कुशीनगर। स्पेशल टास्क फोर्स की लखनऊ यूनिट ने कसया से कंटेनर समेत 72 लाख रुपये कीमत की गांजा के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद भले ही स्थानीय पुलिस की संलिप्तता देखी गई हो लेकिन हकीकत तो यह था कि पुलिस को इस बात की कोई सूचना ही नहीं थी। आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वे असम में एक नकाबपोश व्यक्ति से गांजा खरीदकर बिहार के इलाकों से पार्सल की तरह डिलिवरी करते हुए यूपी के गाजियाबाद तक पहुंचाते थे। इस पूरे सिंडिकेट का सरगना गाजियाबाद में बैठे इस पूरे प्रकरण को डील करता था। इस बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 27 राष्ट्रीय राजमार्ग 27 सहित पूर्वांचल लगायत यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए पश्चिमी यूपी के बड़े शहरों के तस्करों को पार्सल की तरह खेप दी जाती थी जहां से वह स्थानीय स्तर पर बाइक, बोलेरो से छोटे दुकानदारों तक पहुंचाते हैं जहां से पुड़िया के माध्यम से गांजा की तस्करी की जाती है। यूपी एसटीएफ की मजबूत मुखबिर तंत्र के सहयोग से कुशीनगर में सोमवार को गांजा की खेप बरामद हुई।
मऊ और इटावा के तीन तस्कर तो पकड़े गए लेकिन पूछताछ में पता चला कि असम में गांजा की खेप देने वाला और इस पूरे तस्करी सिंडिकेट का सरगना गाजियाबाद में बैठा कोई और है। अंतरराज्यीय गांजा तस्कर गिरोह के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि वे असम से बिहार के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज होते हुए मोतिहारी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर आदि शहरों के रास्ते गांजा की खेप लाते हैं। गोपालगंज की ओर से या तो कुशीनगर में दाखिल हो जाते हैं या लिंक सड़कों का प्रयोग करते हुए भोरे होते हुए देवरिया निकल जाते हैं। यहां से गोरखपुर के रास्ते लखनऊ होते हुए गांजे की खेप गाजियाबाद पहुंचाई जाती है। पहले से डीलिंग के मुताबिक मुख्य शहरों में पहले से मौजूद लग्जरी गाड़ियों में बैठे सफेदपोशों को छोटे छोटे बंडलों में पार्सल की तरह गांजा दिया जाता है। यहां से फुटकर में पुड़िया के माध्यम से दुकानों में गांजा बेची जाती है। तस्करी के इस पूरे रूट में असम तक जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 27 सहायक सिद्ध होता है जो गोपालगंज, मोतिहारी, दरभंगा होते हुए सीधे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज के रास्ते असम तक जाती है। इसमें लखनऊ तक राष्ट्रीय राजमार्ग 28 और यमुना एक्सप्रेसवे भी तस्करों को काफी मदद करता है। कंटेनर होने और पूरी तरह से ठोस पैकिंग के कारण किसी को भी कंटेनर में गांजा या मादक पदार्थ होने का शक नहीं होता है। गिरफ्तार गंजा तस्करों के मोबाइल से दस से अधिक मोबाइल नंबर एसटीएफ लखनऊ के हाथ लगा हैं, जो पूर्वांचल के कई जिलों के रहने वाले हैं और कैरियर के रूप में गांजा का पैकेट रिसीव कर तय स्थान पर पहुंचा देते हैं।