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खतरे के निशान को छूकर वापस लौटी गंडक नदी

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खतरे के निशान को छूकर वापस लौटी गंडक नदी
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- बुधवार की रात में आठ बजे भैंसहा गेज पर खतरे के निशान पर पहुंची थी गंडक
- 4.12 लाख क्यूसेक तक पहुंचा था नदी का डिस्चार्ज, अब तेजी से घट रहा है पानी
अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर। बुधवार को गंडक नदी में चार लाख 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके चलते रात में आठ बजे नदी भैंसहा गेज पर खतरे के निशान (96.00 मीटर) तक पहुंच गई थी।
इसके बाद से डिस्चार्ज में कमी आने लगी है। बृहस्पतिवार की शाम चार बजे डिस्चार्ज घटकर 2.27 लाख क्यूसेक पर आ गया। बढ़े हुए जलस्तर के चलते अब तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के पिपराघाट गांव में पानी भर गया है।
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पहली ही बरसात में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। वाल्मीकिनगर बैराज से मंगलवार की सुबह नदी में एक लाख चार हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार की रात में आठ बजे डिस्चार्ज बढ़कर चार लाख 12 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया। 36 घंटे में ही तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के चलते खड्डा से लेकर तमकुहीराज तक नदी विकराल स्वरूप में आ गया। करीब 12 किलोमीटर चौड़ा दियारा क्षेत्र जलमग्न हो गया है। बुधवार की रात में भैंसहा गेज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान (96 मीटर) तक पहुंच गया था। हालांकि इसी बिंदु पर पानी में ठहराव आया और फिर जलस्तर में कमी आना शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार की सुबह 06 बजे डिस्चार्ज 3.86 लाख क्यूसेक था जो सुबह 10 बजे घटकर 2 लाख 86 हजार हो गया है। दोपहर 12 बजे पानी में और कमी आई और डिस्चार्ज 2 लाख 68 हजार क्यूसेक तक आ गया। शाम चार बजे डिस्चार्ज दो लाख 27 हजार क्यूसेक हो गया था। बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, शिवपुर आदि गांवों की मदद के लिए नायब तहसीलदार व राजस्व कर्मी पूरी रात रेता क्षेत्र में ही रुके रहे।
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