लाल निशान तक पहुंच गई गंडक नदी
सोमवार को डिस्चार्ज बढ़कर 3.57 लाख क्यूसेक पहुंचा
शाम छह बजे तक खतरे के निशान 96.02 मीटर से दो सेंटीमीटर ऊपर थी नदी
बाढ़ बचाव कार्य में जुटे अधिकारी-कर्मचारी, बाढ़ पीड़ितों को कराया भोजन
गंडक नदी के तराई वाले क्षेत्रों में बाढ़ के चलते ग्रामीणों की बढ़ीं दुश्वारियां
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। सोमवार को गंडक नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई। गंडक में पानी का डिस्चार्ज ढाईलाख क्यूसेक से बढ़कर सोमवार को 3.57 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। सुबह गंडक नदी भैसहां गेज स्थल पर खतरे के निशान 96 मीटर से सिर्फ दस सेंटीमीटर नीचे थी, लेकिन तीन बजे खतरे के निशान को भी छू लिया। शाम छह बजे तक नदी खतरे के निशान से दो सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। इससे गंडक नदी के तराई वाले क्षेत्रों फिर से पानी भरने का खतरा उत्पन्न हो गया है। खड्डा क्षेत्र के महदेवा और सालिकपुर गांवों के लोग अभी भी ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। अफसरों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौराकर पीड़ितों की हर तरह की मदद करने का निर्देश दिया। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के अहिरौलीदान गांव के डीह टोला में बाढ़ जैसे हालत हैं तो चैनपट्टी गांव के सामने एपी तटबंध पर दबाव बढ़ गया है। संवाद
खतरे के निशान के करीब पहुंची बड़ी गंडक
खड्डा। गंडक नदी के नेपाल जलग्रहण क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण वाल्मीकिनगर बैराज से सोमवार दोपहर तीन बजे 3,53,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस कारण नदी का जलस्तर भैसहां गेजस्थल पर खतरे के लाल निशान को छू लिया है। बाढ़ प्रभावित लोगों की दुश्वारी बरकरार है। बिहार के जंगल के रास्ते नाव और ट्रैक्टर-ट्रॉली से शिवपुर, हरिहरपुर आदि गांवों में एसडीएम और तहसीलदार ने पहुंचकर लोगों का हाल जाना। खड्डा तहसील क्षेत्र के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर आदि गांवों के लोग बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। यहां तक कोई सीधे पहुंच मार्ग नहीं होने के कारण एसडीएम अरविंद कुमार सोमवार को तहसीलदार कृष्ण गोपाल त्रिपाठी के साथ सुबह वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जंगल के रास्ते बिहार के नौरंगिया पहुंचे। वहां से पैदल रोहुआ नाला तक पहुंचे। नाला को नाव से पारकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से सोहगीबरवा पहुंचे। वहां कैंप कर रही एसडीआरएफ टीम का जायजा लिया। लोगों की सहायता में रुचि नहीं लेने पर नाराजगी भी व्यक्त की। उसके बाद एसडीएम शिवपुर गांव में पहुंचे। इस गांव में एक महिला को आर्थिक सहायता दी। गांव का पैदल भ्रमण करते हुए बाढ़ शरणालय पहुंचे। यहां तहसील प्रशासन की ओर से संचालित कम्युनिटी किचन से लोगों को खाना खिलाया। नायब तहसीलदार रवि यादव के नेतृत्व में चार दिनों से कैंप कर रही राजस्व टीम और पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाया। उपस्थित ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि प्रशासन हर संभव मदद करने में तत्परता से जुटा है। इसके साथ ही लोगों से सतर्कता बरतने, बच्चों व महिलाओं को गहरे पानी की ओर जाने से बचने की अपील की। इस दौरान लेखपाल विपिन मणि, धीरज शुक्ला आदि मौजूद थे। संवाद
गंडक में डिस्चार्ज बढ़ने से दहशत
गंडक नदी सोमवार को खतरे के निशान तक पहुंच गई। गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बैराज से सोमवार को सुबह 3.57 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उस समय खतरे के निशान 96 मीटर से दस सेंटीमीटर नीचे थी, लेकिन दिन के तीन बजते-बजते 96 सेंटीमीटर पर पहुंच गई। शाम छह बजे तक खतरे के निशान से दो सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। संवाद
संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे
खड्डा। नदी का जलस्तर बढ़ने से मरचहवा के तीन टोले और बसंतपुर के बीच का संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई नाव से लोग आ जा रहे हैं। इन गांवों से सोहगीबरवा जाने वाली सड़क बह गई है। बसंतपुर गांव के प्राथमिक स्कूल, मरचहवा के स्कूल, शिवपुर स्कूल व सरकारी अस्पताल, पुलिस चौकी जलमग्न है। बसंतपुर के ग्रामीण जवाहिर, सुनील, महंत, चंदा, हदीश, सूर्यभान, लालू, गुड्डू, सीमा, कुसुमकली, कुंती आदि ने बताया कि पांच दिनों से बाढ़ का पानी लगा है। एक दिन पहले कुछ कम हो रहा था, लेकिन दोबारा भर गया है। गांव के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए नाव से जाना पड़ रहा है। कुछ मवेशियों व बुजुर्ग महिलाओं, बच्चों को किसी तरह सोहगीबरवा ले जाया गया है। प्रशासन की ओर से भोजन मिल रहा है। पानी भरा होने से मच्छरों, जीव-जंतुओं, जहरीले सर्प से खतरा बना है। बिजली नहीं होने से रात में काफी परेशानी हो रही है। मरचहवा के दक्षिण, उत्तर व पूरब टोले के लोगों का भी हाल यही है। संवाद
बाढ़ से पानी में डूबे घर, शरणालय बना ठिकाना
खड्डा। एनएच-727 के सटे महदेवा एवं सालिकपुर गांव के लोगों की दुश्वारी बरकरार है। इन गांवों तक सड़क होने के कारण लोगों को कुछ राहत जरूर मिल रही है, लेकिन इन दोनों गांवों के घरों में पानी भरा हुआ है। लोग नाव से निकलकर, प्रशासन की तरफ से सालिकपुर पुलिस चौकी के पास बनाए गए शरणालय में शरण लिए हैं। इन्हें प्रशासन की तरफ से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। कुछ लोगों राशन किट भी दिया गया है। मवेशियों को भी सड़क के किनारे रखा गया है। अपने बनाए आश्रय को छोड़कर लोगों को सड़क और सरकारी आश्रय में गुजर-बसर करना पड़ रहा है। संवाद
विधायक ने बाढ़ प्रभावितों की जानकारी ली
गंडक नदी पार के शिवपुर, मरचहवा, बसंतपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर गांव के बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने विधायक जटाशंकर त्रिपाठी भी सोमवार दोपहर बाद पहुंचे। प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने एसडीएम अरविंद कुमार और तहसीलदार कृष्ण गोपाल त्रिपाठी से लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता के बारे में पूछा। संवाद
लगाई गई सरकारी नावें
तमकुहीरोड। तमकुहीराज तहसील प्रशासन की ओर से सोमवार को पिपराघाट में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए और सरकारी नावें लगा दी गई हैं। हल्का लेखपाल व राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर आठ सरकारी नावें लगाई गई हैं। क्योंकि गंडक नदी और बांसी नदी में उफान आने से पिपराघाट के कई पुरवे बाढ़ की चपेट में हैं। कई पुरवों में बाढ़ का पानी अभी भी घुसा है। सड़कें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं।
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के पिपराघाट मुस्तकील व पिपराघाट एहतमाली गंडक नदी और बांसी नदी के दोआबा में स्थित बाढ़ प्रभावित गांव हैं। यहां के लोगों को हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। क्योंकि गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही इन गांवों में बाढ़ का पानी बांसी नदी से मिल जाता है। इसका खामियाजा महीनों तक लोगों को भुगतना पड़ता है। चार दिन पहले बाल्मीकिनगर बैराज से चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे शिव टोला, देवनारायन टोला, उपाध्याय टोला, नरवा टोला, मोतीराय टोला, बुटन टोला, हनुमान टोला, जोगनी टोला आदि बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। इन गांवों में जाने वाली सभी सड़कों पर बाढ़ का पानी भरा है। कई पुरवों में अभी तक बाढ़ का पानी घुसा है। इससे लोगों को अपने घरों तक आने जाने के साथ अनेक प्रकार की दिक्कतों को झेलना पड़ रहा है।
हल्का लेखपाल प्रमोद यादव, विनोद गौतम व राजस्व निरीक्षक प्रमोद श्रीवास्तव की रिपोर्ट पर तहसील प्रशासन ने सोमवार को नाविक राजेश, राजेंद्र, पुनदेव, राजबंशी, रामा, बीरेंद्र, कन्हैया और प्रभु सहित आठ नाविकों को सरकारी तौर पर नाव चलाए जाने की अनुमति दिया गया है। संवाद
डीह टोले में घुसा पानी
तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में पिछले तीन चार दिनों से लगातार छोड़े जा रहे काफी मात्रा में पानी से अहिरौलीदान के डीह टोले में बाढ़ की स्थिति है। नदी का पानी लोगों के घरों में घुस गया है। इससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से पिछले 26 अगस्त को चार लाख क्यूसेक से अधिक तो 30 अगस्त को 357000 क्यूसेक पानी गंडक नदी में छोड़ा गया। इससे गंडक नदी उफान पर है। वहीं यूपी के अंतिम छोर व गंडक नदी के किनारे स्थित अहिरौलीदान का डीह टोला बाढ़ की चपेट में है। पूरे टोले में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। कीड़े-मकोड़ों सहित अन्य प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इस टोले के निवासी दिनेश राय, सुजीत यादव, त्रिलोकी राय, बेलास राम, ओमप्रकाश राय, हीरालाल राम, पप्पू सिंह, शिवजी राय, बदरी राम, प्रमोद सिंह, काली राय आदि का कहना है कि उनका टोला बिहार बॉर्डर स्थित यूपी का अंतिम गांव है। गंडक नदी इससे सटकर बह रही है। यहां जल निकासी व सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है। संवाद