पिछले 12 दिनों से मौसम का मिजाज दिन ब दिन बिगड़ता ही जा रहा है। इस बीच दो-तीन दिन धूप होने से लोगों ने थोड़ी राहत जरुर महसूस की थी, फिर भी शीतलहर है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है। देर रात की कौन पूछे, रात में आठ बजे ही पारा लुढककर 18 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ठिठुरे लोग अपना काम जल्दी-जल्दी निपटाकर घरों को चल दिए। नतीतजन इतने समय तक सड़कें भी सुनसान हो गईं।
ठंड लगातार बढ़ने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दिहाड़ी मजदूरों को तो काम मिलना ही मुश्किल हो गया है। सवा महीने से नोटबंदी ने दिहाड़ी मजदूरों को बेरोजगार कर रखा है तो ऊपर से शीतल मानो कहर ढा रही है। अन्य कामकाजी लोग भी ठंड के कारण परेशान हो चले हैं।
बुधवार को दोपहर बाद धूप खिली तो एक बार फिर मौसम दुरुस्त होने की संभावना को बल मिलने लगा था, लेकिन बृहस्पतिवार को हालत यह रही है कि सुबह से शाम तक भगवान भाष्कर ने दर्शन नहीं दिए। लोग जहां-तहां अलाव और गर्म कपड़ों के बीच घिरे रहे। इस ठंड में गर्म कपड़ों की डिमांड भी बढ़ गई है। बृहस्पतिवार को शाम से ही तापमान में गिरावट होती गई और रात आठ बजे तक तो 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।