कुशीनगर फ्लाईओवर में प्रेशर ग्राउटिंग का काम करते तकनीकी टीम।संवाद
पडरौना। एनएन-27 पर कुशीनगर और गोपालगढ़ में 45 करोड़ रुपये की लागत से बने फ्लाईओवर की मजबूती के लिए प्रेशर ग्राउटिंग का काम पूरा कर लिया गया है। मालवाहक वाहन फ्लाईओवर से फिर फर्राटा भरना शुरू कर दिए हैं।
मरम्मत के दौरान यहां से वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप कर दिया गया था। पिछले चार दिनों से बंद पड़े फ्लाईओवर का मरम्मत कार्य पूरा होते ही पांचवें दिन रविवार से वाहनों के आने-जाने के लिए एक बार फिर पूरी तरह खोल दिया गया है।
दरअसल, इन दोनों फ्लाईओवर की मजबूती और सुरक्षा बढ़ाने के लिए पिछले चार दिनों से यहां दिन-रात काम चल रहा था। इसकी शुरुआत तब हुई थी, जब करीब 12 दिन पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मुख्यालय की तकनीकी टीम ने यहां का दौरा किया था। जांच के दौरान टीम ने फ्लाईओवर की उम्र बढ़ाने और इसे और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए थे। निर्माण कंपनी ‘जेके इंजीकान प्राइवेट लिमिटेड’ के इंजीनियरों और कर्मचारियों ने आधुनिक प्रेशर ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर महज चार दिन के भीतर मरम्मत कार्य पूरा कर लिया। रविवार से यहां से गाड़ियां फिर फर्राटा भरने लगी हैं।
यह है प्रेशर ग्राउटिंग तकनीक : प्रेशर ग्राउटिंग पुलों और फ्लाईओवर को अंदर से मजबूती देने की आधुनिक तकनीक है। जब किसी फ्लाईओवर से दिन-रात भारी वाहन गुजरते हैं, तो समय के साथ कंक्रीट के ऊंचे ढांचों के अंदर बारीक दरारें या खोखली जगह बन जाने का खतरा रहता है।
ये दरारें बाहर से दिखाई नहीं देतीं। इसी खोखलेपन को दूर करने के लिए प्रेशर ग्राउटिंग की जाती है। इसमें सीमेंट, पानी और एक खास केमिकल के घोल को मशीनों के जरिए तेज दबाव (हाई प्रेशर) से कंक्रीट के अंदर भेजा जाता है। यह घोल अंदरूनी हिस्सों में खाली जगहों को भर देता है और सूखने के बाद पत्थर से भी ज्यादा मजबूत हो जाता है।
एनएचएआई की टीम ने सुरक्षा के लिहाज से प्रेशर ग्राउटिंग की सिफारिश की थी, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के हादसे का डर न रहे और फ्लाईओवर सालों-साल पूरी तरह सुरक्षित रहे।