कुशीनगर। पिपराघाट से अहिरौलीदान तक एपी बांध पर बाढ़ के कारण तनाव की स्थिति है। यह बांध भौगोलिक रूप से कुशीनगर की सीमा भी निर्धारित करता है। बांध टूटने के बाद पानी की निकासी को लेकर कुशीनगर और सीमावर्ती बिहार के लोगों के बीच खींचतान बढ़ गई है।
दोनों राज्यों की पुलिस और पीएसी बांध पर 24 घंटे निगरानी कर रही है। इसके चलते अहिरौलीदान गांव से बाढ़ का पानी नहीं निकल पा रहा है।
एक ओर कुशीनगर की पुलिस और पीएसी तैनात है। दूसरी ओर गोपालगंज जिले के विशंभरपुर, कुचायकोट, गोपालपुर और जिला मुख्यालय से आई पुलिस मौजूद है। दोनों तरफ के जवानों का उद्देश्य बांध को सुरक्षित रखना है। वे यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पानी अपना रास्ता ले सके। अहिरौलीदान के दानचक के पास एक छोटी पुलिया से पानी निकल रहा है। यूपी के ग्रामीण अपने गांवों से पानी की तेजी से निकासी की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सीमित निकासी से पानी लंबे समय तक जमा रहेगा। एपी बांध टूटने से बड़ी मात्रा में पानी अहिरौलीदान की ओर आया है।
बिहार के सलेपुर, मलई टोला और विशंभरपुर जैसे गांवों में पानी पहुंचने लगा है। दुर्ग मटिहनिया और सिपाया दुबे टोला समेत आसपास के गांव भी प्रभावित हैं। बिहार प्रशासन को आशंका है कि यदि बांध काटकर पानी का बहाव सीधे बिहार की ओर मोड़ा गया तो नुकसान बढ़ सकता है। इसी आशंका के चलते बिहार सीमा से लगे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। बिहार पुलिस प्राकृतिक निकासी को नहीं रोकना चाहती है। परंतु वे सुरक्षित खड़े बांध को काटने की अनुमति नहीं दे सकते।
यूपी के ग्रामीणों की सीधी चिंता है कि उनका गांव डूब रहा है। वे जानना चाहते हैं कि पानी की निकासी कहां से होगी। यही विरोधाभास पिछले दिनों दानचक को तनाव का केंद्र बनाता रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में दोनों तरफ के ग्रामीणों की मांगों को समझना जरूरी है। एक तरफ की चिंता है कि पानी उनके घर तक न पहुंचे। दूसरी तरफ की चिंता है कि उनके गांव का पानी निकल जाए।