कई दिन बांध पर गुजारे, पानी घटा तो घरों की ओर लौट रहे बाढ़ पीड़ित
तिरपाल के नीचे समेटा सामान, बच्चों और मवेशियों को लेकर गांव लौटने की जद्दोजहद
कुशीनगर। कई दिनों तक बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में अब नारायणी नदी का पानी उतरने लगा है। पानी कम होते ही एपी बंधे और ऊंचे स्थानों पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों के कदम फिर अपने गांवों की ओर बढ़ने लगे हैं। जिस रास्ते से वे जान बचाने के लिए घर-द्वार छोड़कर निकले थे, अब उसी रास्ते पर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। किसी के कंधे पर गठरी है तो कोई गोद में मासूम बच्चे को लिए है।
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों बाढ़ का पानी भरने के बाद बाढ़ पीड़ितों ने एपी बंधे, स्कूलों में शरण लिया है, बंधे पर प्लास्टिक की टेंंट में बाढ़ पीड़ितों की रात छह दिनों से कट रही है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी कम हो गया है उसके बाढ़ पीड़ित सोमवार को बंधे से अपना सामान समेटते दिखाई दिए। कोई बिस्तर बांध रहा था तो कोई घर में बची-खुची चीजों को बोरे में भर रहा था।
महिलाओं की चिंता बच्चों और घर के सामान को लेकर थी तो पुरुषों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मवेशियों को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की थी। पानी कम होने के बाद घर लौटे बिरवट गांव के रंभा देवी, अहिरौलीदान के दानचक गांव निवासी शंभू शरण, बागेश्वरी देवी ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से घर में रखा अधिकांश सामान नुकसान हो गया है। सामने अब नई मुश्किल खड़ी है। कई घरों की दीवारें कमजोर हो गई हैं तो कहीं आंगन और रास्तों पर कीचड़ जमा है।
बाढ़ के पानी में डूबे चूल्हे, भीगे अनाज और खराब हो चुके घरेलू सामान को देखकर पीड़ितों की आंखों में फिर चिंता साफ नजर आ रही है। कई परिवारों के लिए घर लौटना खुशी से ज्यादा मजबूरी है। सुरक्षित ठिकाने पर कई दिन गुजारने के बाद अब बच्चों के लिए खाना, पीने का पानी और रहने की जगह जुटाना चुनौती बना हुआ है। लोगों का कहना है कि पानी उतर गया है लेकिन मुसीबत अभी नहीं गई है।
अब जिंदगी को पटरी पर लाने की चुनौती
बाढ़ का पानी कम होने के साथ प्रशासन के सामने भी प्रभावित गांवों में सामान्य जनजीवन बहाल करने की चुनौती है। ग्रामीणों को घरों की सफाई, पीने के साफ पानी, खाद्यान्न, पशुओं के चारे और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है। कई जगह रास्तों पर कीचड़ और जलभराव होने से आवागमन भी आसान नहीं हुआ है। बांध पर गुजरे कई दिनों की पीड़ा समेटे अब लोग घर लौट रहे हैं। आंखों में अपने घर को फिर से बसाने की उम्मीद है लेकिन सवाल यही है कि बाढ़ ने जो उजाड़ा है, उसे दोबारा बसाने में उन्हें कितने दिन लगेंगे।