खड्डा। वाल्मीकिनगर बैराज का एक फाटक टूटने की वजह से गंडक नदी का जलस्तर नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। शनिवार की सुबह अचानक नदी का डिस्चार्ज 3.10 लाख क्यूसेक हो जाने से कुशीनगर जिले के खड्डा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ गई। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग मचान बनाकर शरण लिए हैं। बाढ़ में फंसे लोगों के सामने भोजन से ज्यादा गंभीर संकट पीने के पानी का है। इन गांवों में पिछले 36 घंटे से मवेशी पानी में खड़े हैं।
बृहस्पतिवार के रात में वाल्मीकिनगर बैराज का गेट नंबर 33 कर्मचारियों की लापरवाही के चलते टूट गया था। इसके चलते अचानक गंडक नदी का डिस्चार्ज बढक़र 2.70 लाख क्यूसेक हो गया था। बैराज के अन्य फाटकों से पानी नियंत्रित करने का प्रयास हो रहा है जिसके चलते जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। शनिवार की भोर में फिर नदी का जलस्तर तेजी से बढने लगा। बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार भोर में चार बजे डिस्चार्ज बढक़र 2.80 लाख क्यूसेक हो गया। सुबह छह बजे डिस्चार्ज तीन लाख और सुबह आठ बजे 3.10 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया।
जलस्तर में लगातार हुई बढ़ोत्तरी से खड्डा विकास खंड के गांव मरचहवा दक्षिण टोला व पूरब टोला में लोगों के घरों में पानी भर गया। इस गांव के नरेश, मोसाहब, अनिरुद्ध, अर्जुन, भग्गन, बुधिराम, अमरदीन, रामअवध, बदरी, चन्द्रभान, सरबजीत, शिवकुमारी आदि ने बताया कि पूरा परिवार मचान पर बैठकर वक्त काट रहा है। भोजन व पीने के पानी का संकट गंभीर हो गया है। मवेशी चौबीस घंटे से पानी में ही खड़े हैं और इनको भी चारा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा बसंतपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, बकुलादह, बालगोविंद छपरा, विंध्याचलपुर, महदेवा आदि गांवों में भी बाढ़ से स्थिति बिगड़ गई है। प्रशासन ने बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए छोटी नाव की व्यवस्था कराई है, परंतु पानी के तेज बहाव को देखते हुए गांव के लोग इस पर सवार होकर बाहर निकलना नहीं चाहते हैं। लोगों का कहना है कि छोटी नाव तेज बहाव में पलट जाएगी। इसके अलावा जिले की सीमा से सटे बिहार प्रांत के कतिकी, मंझरिया, श्रीपतनगर, भैंसहिया रेता आदि गांवों में भी बाढ़ का पानी भर जाने से लोग परेशान हैं।