फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंधे पर शरण लिए हैं सैकड़ों परिवार

Sun, 31 Jul 2016 11:29 PM IST
kushinagar
विज्ञापन
बाढ़ - फोटो : santosh verma
विज्ञापन
तमकुहीरोड। गंडक नदी की बाढ़ से प्रभावित पिपराघाट से अहिरौलीदान गांव तक के तमाम लोग एपी तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। कुछ लोग तो इन बंधों पर वर्षों से झोपड़ी या प्लास्टिक की पन्नी तानकर रह रहे हैं, लेकिन कुछ लोग इस बार बाढ़ का पानी घर में घुस जाने के चलते यहां फंसे हैं। प्रशासन की तरफ से इन पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिली है, जिससे इनकी हालत और खराब हो गई है।
विज्ञापन


पिछले दिनों अचानक ही गंडक नदी का डिस्चार्ज साढ़े तीन लाख क्यूसेक तक पहुंच जाने के चलते सेवरही क्षेत्र के पिपराघाट से लेकर अहिरौलीदान तक का पूरा इलाका बाढ़ से प्रभावित हो गया। अकेले पिपराघाट गांव के ही 16 पुरवों में बाढ़ का पानी भर गया। मजबूर लोगों को घर छोड़कर एपी तटबंध के किनारे खुले आकाश तले शरण लेनी पड़ी। इसके अलावा कटान से प्रभावित अहिरौलीदान के कचहरी टोला के लोग भी बरसात शुरू होते ही बंधे पर आ गए थे। पिछले चार साल कट चुके गांव बैरिया टोला और पिपराघाट के फल टोला, नान्हू टोला और गोवर्धन टोला के लोग तो पहले से ही बंधों पर शरण लिए हुए हैं। झोपड़ी और प्लास्टिक की पन्नी तानकर किसी तरह जीवन यापन करने वाले इन लोगों के लिए बाढ़ के साथ बरसात ने भी परेशान कर रखा है। बंधों पर शरण लिए इन लोगों के साथ भोजन-पानी का भी गंभीर संकट बना हुआ है। इस समय पिपराघाट से नरवाजोत और अहिरौलीदान तक सैकड़ों लोग बंधे पर ही दिन-रात गुजार रहे हैं। बंधे पर रहे सुरेन्द्र, रमायन, शिवपूजन, पन्नालाल, सकलदेव, राजेन्द्र आदि बताते हैं कि गांव कटने के बाद अभी तक उनके पुनर्वास की भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। इस संबंध में तहसीलदार तमकुहीराज रामसुधार का कहना है कि बंधे पर शरण लिए लोगों के प्रति प्रशासन गंभीर है। इन लोगों की मदद के लिए व्यवस्था कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें