खड्डा। एआरओ कोर्ट गोरखपुर के आदेश पर राजस्व अभिलेख में फर्जी परवाना से नाम दर्ज कराने की जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। डीएम के निर्देश पर मामले की जांच कर रहे एडीएम न्यायिक शुक्रवार को खड्डा तहसील पहुंचे। तहसीलदार और रजिस्ट्रार कानूनगो का बयान दर्ज करने के बाद करीब चार घंटे तक फर्जी परवाना से जुड़े अभिलेखों की जांच की। इसके बाद पत्रावलियों को लेकर लौट गए। फर्जी परवाना में जिन वादी का नाम शामिल है, उनको नोटिस जारी करने के लिए तहसीलदार को निर्देशित किया।
गोरखपुर एआरओ कोर्ट से फर्जी परवाना व आदेश भेजकर राजस्व अभिलेखों में 15 लोग नाम दर्ज कराने का प्रयास कर रहे थे, जबकि तीन लोगों का मालिकान रजिस्टर में नाम दर्ज हो गया था। नदी उस पार के किसानों की शिकायत पर फर्जीवाड़े की पोल खुली तो डीएम विशाल भारद्वाज ने जांच बिठा दी। इसमें सभी परवाना और एआरओ कोर्ट का आदेश फर्जी मिला। दोपहर में एडीएम न्यायिक तहसील पहुंचे और गोरखपुर सहायक अभिलेख अधिकारी के नाम से भेजे गए फर्जी परवाना व कुशीनगर अभिलेखागार से एआरओ कोर्ट के कथित आदेश के जरिए तहसील के राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज कराने से जुड़े सभी कागजों की जांच की। इसके बाद तहसीलदार महेश कुमार से इस संबंध में जानकारी ली और सभी बिंदुओं को सूचीबद्ध किया। रजिस्ट्रार कानूनगो अन्य कर्मचारियों से अलग-अलग जानकारी ली।
एडीएम न्यायिक प्रेम कुमार राय ने बताया कि फर्जी परवाना के जरिए दर्ज हुए सभी आदेश निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ अभिलेखागार से नकल का माध्यम बनाकर जिन लोगों ने प्रार्थना पत्र दिया है, वह निरस्त किया जाएगा। इसके लिए जिन लोगों के नाम से प्रार्थनापत्र है, उन्हें नोटिस देकर बयान दर्ज किया जाएगा। जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद डीएम के स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
15 ने दिया है प्रार्थनापत्र : गोरखपुर सहायक अभिलेख अधिकारी के कोर्ट से जारी आदेश की नकल के जरिए करीब 15 मामले में नाम दर्ज कराने के लिए खड्डा तहसील में प्रार्थना पत्र दिया है। इन मुकदमों के संबंध में जब जांच कराई गई तो एआरओ कोर्ट की ओर से बताया गया कि इस तरह का कोई मुकदमा उनके कोर्ट में नहीं चला है। इसके अलावा तीन ऐसे मामले थे, जिनमें नाम दर्ज करने के लिए आवेदन दिया गया था।