मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज करते चिकित्सक ।संवाद
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पडरौना। डिजिटल युग में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम उनकी आंखों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। अधिक समय तक मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से बच्चों का रेटिना सिकुड़ रही है और कम उम्र में ही मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) की समस्या बढ़ रही है।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. पंकज ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 80 से 85 मरीज ओपीडी में आ रहे। इसमें आठ से दस मरीज इस तरह के आ रहे। यह समस्या 15 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक मिल रही है। इससे उनकी आंखों में सूखापन आ रहा है। रेटिना पर दबाव पड़ रहा है। इसका परिणाम यह हो रहा कि छोटी उम्र में ही चश्मा लगाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लगातार स्क्रीन देखने से ब्लिंक रेट कम हो जाता है, जिससे आंखें ड्राई हो जाती हैं। इससे कार्निया प्रभावित हो सकती है। ज्यादा स्क्रीन टाइम और कम आउटडोर एक्टिविटी मायोपिया का प्रमुख कारण है। विद्यालय में शिक्षकों को भी ध्यान देना चाहिए कि जो बच्चे पीछे बैठे हैं उन्हें ब्लैक बोर्ड पर साफ दिखाई दे रहा है या नहीं। अगर नहीं दिखाई दे रहा है तो परिजन को सूचना दें जिससे बच्चों का सही समय पर इलाज हो सके।
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चिकित्सक की अभिभावकों को सलाह
- बच्चों की आंखों की नियमित जांच कराएं।
- अभिभावक बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें।
- बच्चों को प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने दें।
- बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखें।
- स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करें।