पडरौना। यूपी बोर्ड की तर्ज पर इस बार विश्वविद्यालय से संबद्घ कॉलेजों का भी सेंटर जाएगा। केंद्र निर्धारण के मामले में शासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इसमें जिन कॉलेजों में सामूहिक नकल की कार्रवाई की गई है, उन्हें केंद्र न बनाए जाने का संकेत दिया गया है। इसके अलावा बैठने की व्यवस्था, चहारदीवारी, गेट, विद्युत व्यवस्था, शुद्घ पेयजल, अग्निशमन यंत्र, प्रबंध समिति के बीच विवाद आदि को देखते हुए केंद्र न बनाए जाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इस जानकारी के बाद जिले के कई कॉलेज संचालकों के होश उड़ गए हैं। पत्र मिलते ही कई जगह अपेक्षित कार्य पूरे कराए जाने लगे हैं। परीक्षा समिति की बैठक के बाद से ही नए सिरे से केंद्र निर्धारण का होना तय माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षा के दौरान नकल की शिकायत मिलने पर शासन की ओर से कई हथकंडे अपनाए गए थे, लेकिन नकल माफियाओं पर इसका कुछ खास असर नहीं पड़ा। निजी कॉलेज संचालक छात्रों का भरपूर नामांकन कर बेहतर परिणाम दिलाने की गारंटी देते थे। इस बार शासन ने नकल रोकने के लिए विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों को सेंटर बनाए जाने का निर्देश दे दिया है। इसके बाद निजी कॉलेज के कुछ संचालकों ने इसका विरोध भी किया और परीक्षा समिति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। तब परीक्षा समिति ने संचालकों की समस्याओं और उनकी बातों से शासन को अवगत कराया।
इस पर अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने कुछ बिंदुओं में परिवर्तन करते हुए नए सिरे से पत्र भेजकर केंद्र निर्धारण करने और परीक्षा कराए जाने का निर्देश दिया है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति ने यूनिवर्सिटी से संबद्घ कॉलेज संचालकों को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया है। साथ ही यह भी बताया है कि केंद्र बनाए जाने के समय सभी मानक पूर्ण होने चाहिए। अगर मानक पूरा नहीं है, तो उस कॉलेज को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
इसकी पुष्टि करते हुए उदित नारायण पीजी कॉलेज पडरौना के प्राचार्य डॉ. अयोध्यानाथ त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षा केंद्र बनाने के संबंध में शासनादेश आ गया है। शासन और गोरखपुर विश्वविद्यालय के आदेशानुसार परीक्षा संपन्न कराई जाएगी।