गुरवलिया बाजार। महाकुंभ में मंगलवार देर रात भगदड़ से हुए हादसे के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था खत्म नहीं हुई और वह मौनी अमावस्या के बीतने के बाद भी प्रयागराज शहर में झूंसी से लेकर अन्य जगहों का दर्शन करते रहे। इधर मौनी के मौन के बाद भी उत्साहित श्रद्धालु प्रयागराज में वासंतिक माहौल बनाने को लेकर आतुर रहे। प्रत्यक्षदर्शी महिलाओं का कम न हुआ उत्साह...टिकी रहीं : महासोन की शोभा त्रिपाठी, प्रमिला देवी, भलुही की कविता देवी, कुचिया मठिया के चनरदेव गुप्ता, लक्ष्मण यादव, सुमित्रा देवी, कोशिला देवी, जोनहिया देवी, रीता देवी, राजा विशुनपुरा के राम जतन प्रजापति आदि पुरुष-महिलाओं समूह में एक साथ प्रयागराज गई थीं। लक्ष्मण यादव ने बताया कि जब भगदड़ मची तो सामने ही चीख पुकार मच गई। हालांकि, बाद में प्रशासन और मेडिकल टीम ने मुस्तैदी से कंट्रोल कर लिया। कौशिला देवी आदि महिलाओं ने बताया कि इसके बाद आस्था का ज्वार संगम घाट पर कम न हुआ। बताया कि प्रयागराज महाकुंभ का आनंद तुरंत स्नान कर भागने में नहीं बल्कि जगहों को ढूंढ़ कर आनंद लेने में है।
प्रयागराज रवाना होता रहा जत्था : प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ के बाद एक तरफ जहां सीमाएं सील थी और लोग परेशान रहे। इसके इतर जिले के लोग वसंत पंचमी पर अमृत स्नान के लिए प्रयागराज रवाना होते रहे।
अलग-अलग जगहों से श्रद्धालुओं का जत्था रवाना हुआ। सौंदिया के देवेंद्र पांडेय, देवपोखर के प्रकाश सिंह आदि आठ से अधिक श्रद्धालु गोरखपुर से प्रयागराज के लिए निकले। उनका मानना था कि थोड़ी परेशानियों से आस्था कम नहीं हो सकती। 144 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग आया है।