कुशीनगर। गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाना क्षेत्र का रहने वाला कुख्यात पशु तस्कर सतीश इन दिनों जेल में भले ही बंद है, लेकिन इसका नेटवर्क अभी भी यहां सक्रिय है। गोरखपुर, कुशीनगर और बिहार तक दरवाजे से गोवंश चोरी कर तस्करी करने वाले गिरोह के पकड़े गए तीन सदस्यों की पूछताछ में इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
गांव वालों की मदद से पकड़े गए इन तीनों को पुलिस जेल भिजवा चुकी है, लेकिन इस गिरोह से जुड़े बिहार के पशु तस्करों की तलाश तेजी से चल रही है। इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस बिहार तक जाल बिछाया है। विशुनपुरा थाना क्षेत्र से चोरी गए चार गोवंश का अभी तक पता नहीं चल सका है। हाटा कोतवाली क्षेत्र के सुकरौली में हाईवे के किनारे से पिछले साल सितंबर में गोवंश को चोरी से स्कार्पियों में लादने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
उसी समय गोरखपुर के महुआचाफी की घटना के बाद जिले की पुलिसकर्मियों की संलिप्तता मिलने पर हटाया गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि गोरखपुर का रहने वाला शातिर पशु तस्कर सतीश यादव और इसके गिरोह में शामिल युवकों ने घटना को अंजाम दिया है। पुलिस स्कार्पियों पर लगे दिल्ली के नंबर की मदद से पशु चोरी करने वाले तस्करों तक पहुंची।
पुलिस इस मामले में कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के सेमरा हरदो के मुमताज, पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बसहिया बनवीरपुर निवासी नियाज, तरायासुजान थाना क्षेत्र के राकेश कुशवाहा, विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही नगर का राधाकृष्ण को जेल भिजवा दिया था, जबकि मामले में वांछित सतीश ने गोरखपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। तभी से वह जेल में बंद है।
सूत्रों के अनुसार गोवंश चोरी करने वाले गिरोह का सरगना सतीश और इसका गोपालगंज का रहने वाला इसका एक साथी है। इसके गिरोह में 20 से अधिक लोग कुशीनगर जिले के रहने वाले हैं जो ऐसी वारदात को अंजाम देते हैं। तुर्कपट्टी पुलिस के हत्थे चढ़े तीनों पशु तस्करों ने इस खेल की सच्चाई बताई है।
जानकारी के अनुसार पुलिस गिरोह के सदस्यों को ट्रेस कर ली है और गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। स्थानीय पुलिस के अलावा स्वाट, सर्विलांस की टीम भी लगी है। पडरौना सीओ डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि पूछताछ में गोवंश चोरी करने में कुछ लोगों का नाम सामने आया है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगाई गई है।