छोटी गंडक नदी से किया जा रहा अवैध बालू खनन।
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पडरौना। एनजीटी के निर्देश और प्रदेश सरकार की सख्ती के बावजूद जिले में अवैध बालू खनन का धंधा बदस्तूर जारी है। अधिकारी अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई का दावा तो करते हैं, लेकिन इस पर लगाम नहीं लग पा रहा है। वैसे जिले में पांच स्थानों पर बालू खनन का पट्टा दिया गया है, लेकिन इनमें से सिर्फ एक स्थान पर खनन हो रहा है जबकि अवैध खनन दो दर्जन से अधिक स्थानों पर हो रहा है। जिले में बड़ी गंडक, छोटी गंडक व बांसी नदी के किनारे खुलेाम बालू खनन हो रहा है। तीन साल पहले एनजीटी ने पर्यावरण सुरक्षा का हवाला देते हुए खनन को प्रतिबंधित कर दिया था। पिछले साल कुछ शर्तों के साथ खनन का आदेश दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने दिसंबर में विरवट कोन्हवलिया समेत 26 जगहों पर बालू खनन के लिए पट्टा देने का प्रयास किया, लेकिन केवल पांच जगह ही पट्टा हो पाया। इनमें से तीन पट्टा बड़ी गंडक नदी के किनारे विरवट कोन्हवलिया में हुआ है, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते यहां खनन नहीं हो रहा है। विधायक अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में यहां पिछले 125 दिन से पट्टा निरस्त करने की मांग पर आंदोलन चल रहा है।
अधिकारियों के माने तो अवैध बालू खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई होती है। कप्तानगंज के एसडीएम प्रमोद कुमार व खड्डा एसडीएम अरविंद कुमार ने एक महीने में 20 से अधिक जगहों पर अवैध बालू खनन में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए छापेमारी कर चुके हैं। तमकुहीराज के एसडीएम त्रिभुवन ने भी गंडक नदी के किनारे छापेमारी की थी। इससे पहले कप्तानगंज और हाटा में एसडीएम रहते हुए भी वे लगातार छापेमारी करते रहे थे। हालांकि इतना सब कुछ होने के बाद भी अवैध खनन का रुक नहीं रहा है। यह कार्य रुक नहीं रहा है।