पांचवें दिन आई और झलक दिखाकर चली गई बिजली
ट्रांसफार्मर लगने के बाद खराब हो गया फीडर, परेशान रहे उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। बिजली समस्या पडरौना नगर से खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में शुरू हुई बिजली की मस्या 18 जुलाई की शाम को खत्म हुई। इसके बाद फिर 24 जुलाई से समस्या ने फिर विकराल रूप धारण कर लिया। रविवार शाम (28 जुलाई की शाम) करीब सात बजे बिजली आई और फिर कुछ ही देर बाद चली गई।
सात जुलाई को समीक्षा बैठक के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने लचर बिजली व्यवस्था के लिए दो अधिशासी अभियंताओं पर कार्रवाई क्या की, इसके बाद से शहर और आसपास के गांवों की बिजली व्यवस्था भी चौपट हो गई। उस दिन 10 एमवीए का ट्रांसफार्मर जलने पर किसी तरह बदला भी गया तो क्षमता बढ़ाने की बजाय करीब दस दिन बाद आठ एमवीए का ट्रांसफार्मर लगा दिया गया। इसके बाद 24 जुलाई को 10 एमवीए का दूसरा ट्रांसफार्मर भी जल गया। लोगों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए कोटवा उपकेंद्र के लिए लाया गया 10 एमवीए का ट्रांसफार्मर 26 जुलाई को पडरौना उपकेंद्र में लाया गया। तब भी बिजली व्यवस्था न सुधरी। नाराज उपभोक्ताओं ने शनिवार रात पडरौना हाइडिल में पहुंचकर पुरजोर नाराजगी जताई। जैसे-तैसे विद्युतकर्मियों ने ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली आपूर्ति शुरू कर दी, लेकिन उसके बाद पडरौना का टाउन-टू का फीडर जल गया। उपभोक्ता विद्युत निगम के अभियंताओं बिजली व्यवस्था के बारे में जानकारी लेने के लिए फोन करते रहे, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था।
प्रभारी एक्सईएन चंद्रबली ने बताया कि ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है। फीडर में गड़बड़ी आ गई थी। गोरखपुर से एक्सपर्ट बुलाया शाम सात बजे से आपूर्ति शुरू की गई। लोड के कारण ट्रिपिंग हो रही है। इससे फाल्ट बढ़ा है। प्रयास किया जा रहा है फाल्ट दूर कर जल्द से जल्द पूरे नगर में आपूर्ति बहाल कर दी जाए। वहीं नौका टोला का भी ट्रांसफार्मर बदल दिया गया है। लोग धैर्य रखें और सहयोग करें।
उपकेंद्र में जुटी भीड़ को पुलिस ने खदेड़ा
पडरौना। बिजली नहीं मिलने से गुस्साए लोग रविवार शाम विद्युत उपकेंद्र पहुंच गए। सूचना मिलते ही बिजली निगम के कर्मियों ने एसडीएम सदर और पुलिस को सूचना दी। एसडीएम सदर रामकेश यादव कोतवाली पुलिस के साथ पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को उपकेंद्र के बाहर खदेड़ा। बावजूद इसके बिजली की मांग को लेकर लोग डटे रहे। एसएसआई नागेंद्र सिंह ने बताया कि वह सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ हाइडिल में हैं। ताकि उपभोक्ताओं और विद्युतकर्मियों में कोई विवाद न होने पाए।
पापा बिजली लेते आना...
पडरौना। बिजली न मिलने का कष्ट बच्चों में भी दिखने लगा है। उमस भरी गर्मी में उनका रोना, चिल्लाना, चिड़चिड़ापन आम बात हो गई है। गर्मी के दौरान अंधेरे में पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे है। रविवार की देर शाम पडरौना हाइडिल में खड़े एक व्यक्ति के मोबाइल की घंटी बजी। उधर से बच्चे की आवाज आई। बच्चे ने कहा कि पापा कहां हैं? उन्होंने आवाज दी कि हाइडिल में। बच्चे ने पूछा कि हाइडिल कहां है तो उन्होंने बताया कि जहां से बिजली आती है। फिर बच्चे ने कहा कि पापा आते समय बिजली लेते आना। घर में लाइट नहीं है, अंधेरा है और टीवी भी नहीं चल रहा है।
आपूर्ति न मिलने से संचार व्यवस्था गड़बड़ाई
पडरौना। बिजली की आपूर्ति न होने से लोगों के चैन के साथ ही अपनों से भी दूर कर दिया है। कारण कि बीएसएनएल की तरफ से पडरौना के एक्सचेंज को डीजल मिलता ही नहीं है। वहीं एक्सचेंज में लगे जेनरेटर को चलाने के लिए हर घंटे आठ लीटर डीजल की जरूरत है। ऐसे में बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड, लैंडलाइन और मोबाइल सेवा ठप हो गई है। यही नहीं निजी टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क भी बेहद कमजोर हो गए हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर किसी भी अधिकारी या कर्मी ने ऑन द रिकार्ड बनाने से मना कर दिया। हालांकि समस्या की बात स्वीकार की और कहा कि इसकी जानकारी अफसरों को दे दी गई है। कहा, कई दिनों से लगातार बिजली न रहने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। यही समस्या निजी टेलीकॉम कंपनियों के साथ भी है। यही वजह है कि मोबाइल पर बातचीत के दौरान कॉलड्रॉप या अस्पष्ट आवाज आने की समस्या हो रही है। बीएसएनएल उपभोक्ता शमशेर मल्ल, राजेंद्र केसरवानी, नवीस आलम, हेमंत, मंटू गुप्ता, विजय मद्धेशिया आदि ने बताया कि पडरौना एक्सचेंज में 80 केवीए का जेनरेटर लगा है, जिसे सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रति घंटे आठ लीडर डीजल की जरूरत पड़ती है। विभाग की तरफ से डीजल न मिलने के कारण ये सेवाएं ठप हो गई हैं।