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Kushinagar News: बाढ़ से स्थायी बचाव की कवायद, कंप्यूटर मॉडल से समझेंगे गंडक की चाल

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कुशीनगर। एपी बांध टूटने से तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में मची तबाही की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान की तलाश तेज हो गई है। नारायणी (गंडक) नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए चेनलाइजेशन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इसके लिए तकनीकी अध्ययन कराया जा रहा है। रविवार को आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय ने एपी बांध का निरीक्षण किया और नदी की भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। वह कंप्यूटर आधारित न्यूमेरिकल स्टडी के माध्यम से नदी के व्यवहार का विश्लेषण कर सरकार को प्रस्ताव सौंपेंगे।
नेपाल में तबाही के बाद नारायणी नदी में 5.50 लाख क्यूसेक से अधिक पानी पहुंचने पर 28 सितंबर की रात गौरहा गांव के पास एपी बांध टूट गया था। इससे तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में बाढ़ से तबाही मची थी। इसके बाद 28 सितंबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थायी समाधान का आश्वासन देते हुए नदी के चेनलाइजेशन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे।
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प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय के अनुसार, गंडक जैसी विशाल नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए केवल मौके पर निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है। नदी के बहाव, जलस्तर, कटान और गाद के जमाव का वैज्ञानिक विश्लेषण भी जरूरी है। इसके लिए न्यूमेरिकल स्टडी यानी कंप्यूटर आधारित गणितीय मॉडलिंग की मदद ली जा सकती है।
इस अध्ययन में नदी की चौड़ाई, गहराई, बहाव की गति और जलस्तर से जुड़े आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग परिस्थितियों में नदी के व्यवहार का आकलन किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि तेज बहाव के दौरान किन स्थानों पर तटबंधों पर अधिक दबाव पड़ता है, कहां कटान की आशंका है और नदी की धारा किस दिशा में बदल सकती है।
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इसके साथ ही नदी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और गाद के जमाव का अध्ययन कर भविष्य में धारा में होने वाले बदलावों का भी आकलन किया जाएगा।
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