जिले के सरकारी अस्पतालों में आवश्यकता से काफी कम हैं डॉक्टर
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी काफी कम
- जिले में संचालित हैं 14 सीएचसी और 56 पीएचसी
- कुल अस्पतालों को मिलाकर 556 बेड की है क्षमता
- 189 के सापेक्ष 158 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं सीएमओ के अधीन सरकारी अस्पतालों में
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे दुरुस्त रहे, जब डॉक्टरों की संख्या ही कम है। सीएमओ के अधीन आने वाले 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध डॉक्टरों की बात करें तो 189 के सापेक्ष 158 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। सृजित पदों के सापेक्ष अभी भी 31 डॉक्टरों की आवश्यकता है। महिला डॉक्टरों की संख्या तो और भी कम है। इतने अधिक सरकारी अस्पतालों में 14 महिला डॉक्टर तैनात हैं। ऐसे में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाता। सर्वाधिक परेशानी महिला मरीजों को होती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर न होने पर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं या दुष्कर्म पीड़ितों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। हालांकि जिला अस्पताल में भी अब कोई गायनोकोलॉजिस्ट नहीं है। गंभीर हालत में अन्य महिला मरीजों का इलाज भी नहीं हो पाता है।
जिले की जनसंख्या 40 लाख के करीब पहुंच गई है। इतनी अधिक आबादी पर जिले में 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सीएमओ के अधीन आने वाले इन अस्पतालों में डॉक्टरों के 189 पद सृजित हैं, जिसमें 158 पद ही भरे हैं। 31 रिक्त हैं। उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों की बात करें तो इनमें चिकित्साधिकारी के 32 पदों के सापेक्ष 14 ही कार्यरत हैं। इनके अलावा एमएएस आर्थो के तीन, फिजिशियन दो, चर्मरोग विशेषज्ञ एक, रेडियोलॉजिस्ट एक, गायनोकोलॉजिस्ट एक, एनेस्थेसिया के दो और कॉर्डियोलॉजिस्ट डिप्लोमा वाले दो डॉक्टर उपलब्ध हैं। इनके अलावा 11 डॉक्टर (बाल रोग विशेषज्ञ) ईटीसी (इंसेफेलाइटिस ट्रिटमेंट सेंटर) के इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दुदही और विशुनपुरा सीएचसी में चिकित्साधिकारी का पद रिक्त है। डॉक्टरों की कम संख्या का प्रभाव मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है।
तैनात हैं सिर्फ 14 महिला डॉक्टर
सीएमओ के अधीन अस्पतालों में जहां महिला डॉक्टर तैनात हैं, उनमें राजकीय महिला अस्पताल पडरौना में दो, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा व तमकुहीराज में दो-दो, सीएचसी सुकरौली, मोतीचक, कसया, तुर्कहां (खड्डा), सेवरही, विशुनपुरा, नेबुआ नौरंगिया और दुदही में एक-एक महिला डॉक्टर तैनात हैं। महिला डॉक्टर कम होने से आधी आबादी का इलाज प्रभावित होता है। खासकर इनमें जिन अस्पतालों में गायनोकोलॉजिस्ट नहीं हैं, वहां दुष्कर्म या प्रसव संबंधी गंभीर हालत वाले मरीजों के पहुंचने पर उनका इलाज नहीं हो पाता और उन्हें रेफर करना पड़ता है। अभी 29 जनवरी की रात एक मामला सामने आया था, जब दुष्कर्म पीड़ित बच्ची का इलाज गायनोकोलॉजिस्ट के अभाव में मेडिकोलीगल न तो नेबुआ नौरंगिया सीएचसी पर हो पाया था और न ही जिला अस्पताल में। इस वजह से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में भी उसका इलाज नहीं किया जा रहा था, जबकि उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी।
सृजित पदों के सापेक्ष जिले में डॉक्टरों की संख्या कम है। इनमें भी विशेषज्ञ डॉक्टर कम हैं। महिला डॉक्टरों की संख्या भी आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। इस वजह से मरीजों को परेशानी होती है। इस समस्या से विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
डॉ. नरेंद्र प्रसाद गुप्त, सीएमओ