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‘जहां ऋषि चारों वेद गावे रे बटोहिया....’

Sun, 15 Apr 2018 11:07 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
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सांस्कृतिक कार्यक्रम। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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फाजिलनगर।  विलुप्त होती लोक कलाओं और लोक संस्कृतियों के संरक्षण के उपायों पर चर्चा तथा कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए उनके कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ ही जोगिया जनूबी पट्टी मे आयोजित दो दिवसीय 11वें लोकरंग कार्यक्रम का समापन शनिवार की देर रात हो गया। आयोजन समिति ने अतिथियों को स्मृति चिह्न देने के साथ ही अगले वर्ष पुन: इस कार्यक्रम में मौजूद रहने की अपील की।  
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सांस्कृतिक भड़ैती और फूहड़पन के विरुद्ध जनसंस्कृतियों के संवर्धन के लिए आयोजित इस दो दिवसीय लोकरंग कार्यक्रम में दूसरी रात का शुभारम्भ बलिया के आशीष त्रिवेदी एवं साथियों की तरफ से प्रस्तुत गाया जाने वाला जन गीत ‘राजा मरले आसमान में उड़त मैना...’ से हुआ। इसके बाद नीदरलैंड के प्रख्यात सरनामी गायक राजमोहन की गिरमिटिया भोजपुरी गीत जायो जायो भैया हिन्द देश देख आयो, जहां ऋषि चारों वेद गावे रे बटोहिया की प्रस्तुति हुई। इस गीत के जरिए राजमोहन ने यह बताने का प्रयास किया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व भारत छोड़कर विदेश गए गिरमिटिया मजदूरों के वंशज आज भी भारत के प्रति सम्मान और आस्था का भाव रखते हैं। इसके अलावे उनकी प्रस्तुति भूल बिसर नहीं जाना कन्हैया मोरे गली आना को भी खूब पसंद किया गया। आरा की मशहूर लोकगीत गायिक चंदन तिवारी व बलिया के गायक नन्दलाल राम के गीतों पर उनके साथियों ने गोड़उ नृत्य प्रस्तुत कर लोक कलाओं को जीवंत कर दिया।

 चंदन तिवारी की लोक गीत पिया गइले पूर्वी बनिजिया व छोड़ी द गोरकी करल खुशामी बलमा, एकर कहिया लें करव गुलामी बलमा ने कार्यक्रम को विशिष्टता दी। शुफी कौव्वाल बाराबंकी के इकबाल वारसी व देवा की प्रस्तुति भर दे झोली मेरी ए मोहम्मद सुनाया। लोकनृत्य समूह जयपुर राजस्थान के कलाकारों ने चंदनलाल कालबेलिया के निर्देशन मे बणजारा-बणजारी और ग्रामीण भवाई नृत्य प्रस्तुत कर विलुप्त हो रही लोक कलाओं को मंच पर जीवंत कर दिया। इन कलाकारों के प्रस्तुति ने सभी को रोमांचित कर दिया।  
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इसके बाद क्षेत्र के लाला गुरवलिया निवासी श्यामलाल व उनके साथियों ने पखावज नृत्य प्रस्तुत कर नयी पीढ़ी को विलुप्त हो रही इस लोक विधा से परिचय कराया।  
समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही और बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉक्टर केपी कुशवाहा ने कार्यक्रम में आये सभी साहित्यकारों, रचनाकारों व रंगकर्मियों को स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया गया। अंत मे साइक्लोरामा नाट्य समूह दिल्ली की तरफ से रतन वर्मा की लिखित तथा दिलीप गुप्ता द्वारा निर्देशित नाटक नेटुआ का मंचन किया गया।       दोनों दिन के कार्यक्रम का संचालन रीवा विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा ने किया।  

अंत मे कार्यक्रम के आयोजक सुभाष चंद कुशवाहा ने सभी आगन्तुकों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान मनोज कुमार सिंह, डॉक्टर किरण कुशवाहा,  श्रीमती आशा कुशवाहा, विष्णुदेव राय, हदीश अंसारी, भुनेशवर राय, इसराइल अंसारी, संजय कुशवाहा, सिकंदर प्रसाद गोंड़, सुरेंद्र शर्मा, मंजूर अली, नरेश राय, बुनेला यादव, मैतूल मस्ताना आदि मौजूद रहे।
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