पडरौना। अखिल भारतीय मध्याह्न भोजन रसोइया महासंघ की तरफ से मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में चार घंटे तक धरना दिया गया। इन लोगों ने नियुक्ति में पाल्य व्यवस्था समाप्त करने और मानदेय सीधे खाते में भेजने समेत पांच सूत्री ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया। मुख्यमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में मांगें पूरी न होने पर नए सत्र में व्यापक स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
सुबह 10 बजे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्रनाथ गौतम की अगुवाई में संगठन से जुड़े जिले भर के रसोइया कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए। करीब दो बजे तक चले इस धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि रसोइया विद्यालयों में 11 महीने भोजन बनाते हैं, जबकि उन्हें 10 महीने का ही मानदेय दिया जाता है। यह मानदेय भी ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक के खाते में आता है। इसकी वजह से रसोइयों को कभी भी समय से मानदेय नहीं मिलता। आरोप लगाया कि प्रधान व प्रधानाध्यापक रसोइयों का उत्पीड़न करते हैं।
जिलाध्यक्ष लीलावती देवी ने कहा कि किसी भी विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए पाल्य व्यवस्था को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। इस नियम के चलते रसोइयों को परेशान किया जाता है और कई बार तो इसी आधार पर कार्य से हटा भी दिया जाता है। दोपहर बाद इन लोगों ने कलेक्ट्रेट प्रभारी को पाल्य व्यवस्था की अनिवार्यता समाप्त करने, एनजीओ की बजाय पहले से नियुक्त रसोइयों से ही मध्याह्न भोजन बनवाने, मानदेय सीधे खाते में भेजने आदि से संबंधित मांग पत्र सौंपा। इस दौरान सजेश कुमार आर्य, संगीता यादव, सीमा, ज्ञांती, शांती, शीला, तारा, सोनी, देवेंद्र सिंह, रमेश, विनोद कुमार, द्वारिका गोंड़, फुलवंती देेवी सहित तमाम रसोइया मौजूद रहे।