महापरिनिर्वाण मंदिर में बुद्ध की लेटी प्रतिमा चीवर चढ़ाते जिले के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप स
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कसया(कुशीनगर)। इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में मंगलवार को बौद्ध धरोहर, कला-संस्कृति और पर्यटन विकास पर गहन मंथन हुआ। महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में आयोजित सत्र में देश-विदेश से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
“बुद्धिज़्म, धम्म संवाद और विकास” विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में बौद्ध विरासत के संरक्षण, वैश्विक प्रचार-प्रसार और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बौद्ध स्थलों के संरक्षण के साथ उन्हें विश्व स्तर पर बेहतर ढंग से प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है।
पैनल चर्चा के मॉडरेटर स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जेएनयू के प्रो. संजय कुमार पाण्डेय रहे। प्रथम वक्ता के रूप में साउथ कोरिया स्थित गंगवान बुद्धिस्ट इंटरनेशनल संस्थान के चांसलर प्रो. रान ली ने बौद्ध दर्शन के वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। लाओस के पूर्व पर्यटन उप मंत्री बोधि सेन ने बौद्ध पर्यटन की संभावनाओं पर विचार रखे। यूएसए की बौद्ध मेडिटेशन टीचर लामा आर्या डोल्मा ने ध्यान और आध्यात्मिकता के महत्व को रेखांकित किया। वहीं जेएनयू स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स के प्रो. वाईएस अलोने ने बौद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत पर अपने विचार व्यक्त किए।
नई दिल्ली स्थित जापानी दूतावास के मिनिस्टर काउंसलर नोरियाकी एबे ने भी भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों और बौद्ध धरोहर की साझा विरासत पर प्रकाश डाला।