पडरौना। डीएम के निर्देश पर 101 निजी अस्पतालों की हुई जांच में रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल कर गई डाॅक्टरों की डिग्री पर भी संदेह गहरा गया है। जिन डाॅक्टरों के नाम से रजिस्ट्रेशन था, वे अस्पतालों में नहीं मिले। संचालक भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। ऐसे में सीएमओ की ओर संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और जिस प्रदेश की डिग्री होगी वहां की मेडिकल ऑफ काउंसिल को पत्र भेजा जाएगा। इसकी गोपनीय तैयारी शुरू हो गई है। इसके पहले भी रजिस्टर्ड अस्पताल की जांच में इस्तेमाल की गई डिग्री फर्जी मिल चुकी है।
इलाज के नाम पर खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसता देख निजी अस्पताल संचालक घबरा गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के कई जिम्मेदारों के पास सफेदपोश और विभागीय कर्मचारी पैरवी में लगे हैं। निजी अस्पतालों की कराई जा रही क्राॅस चेकिंग से जुड़ी एक-एक जानकारी डीएम खुद ले रहे हैं।
रामकोला में संचालित गीताजंली हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत होने के बाद काफी महंगा हुआ, पुलिस संचालक अरविंद शर्मा पर प्राथमिकी दर्ज की, संचालक अरविंद शर्मा की पत्नी मीरा शर्मा की डिग्री पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला कि रजिस्ट्रेशन के लिए लगाई गई मीरा देवी की डिग्री फर्जी है। इस मामले में प्रसूता के पति की तहरीर पर पुलिस ने दूसरा प्राथमिकी दर्ज की।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन डॉक्टरों के नाम पर अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, अस्पतालों में अधिकत डाॅक्टर नहीं मिले। उन डाॅक्टरों के मोबाइल नंबर पर संपर्क भी नहीं हो सका। कई अस्पताल संचालकों ने विशेषज्ञ डाॅक्टर की डिग्री का जिक्र करते हुए अपना नाम बोर्ड पर लिखवाया है। इस आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने रजिस्ट्रेशन में लगाई गई डाक्टर की डिग्री की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसकी सूची भी तैयार की जा रही है।
-जांच में जिस तरह की गड़बड़ियां मिली हैं, उससे रजिस्ट्रेशन के लिए लगाई गई डाॅक्टरों की डिग्री संदेह के घेरे में आ गई हैं। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में कई ऐसे अस्पताल चिह्नित किए गए हैं, जिसके बोर्ड पर विशेषज्ञ डाॅक्टर की सूची में संचालक का भी नाम है। जबकि उनके अस्पताल का रजिस्ट्रेशन दूसरे डाॅक्टर के नाम पर हैं। जांच में वे डाॅक्टर मिले नहीं। इसलिए डिग्री की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। -डाॅ. एसएन त्रिपाठी, प्रभारी सीएमओ कुशीनगर