लाल निशान को छूकर लौटने लगी गंडक नदी, फिर भी संकट बरकरार
खड्डा (कुशीनगर)। गंडक नदी में सोमवार की रात दो बजे 339200 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से आया उफान अब कम होने लगा है। मंगलवार दोपहर दो बजे वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में 254400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। परिणाम स्वरूप छितौनी तटबंध के भैसहां गेज पर नदी मंगलवार की सुबह खतरे के निशान (96 मीटर) से महज 20 सेंटीमीटर नीचे (95.80 मीटर) थी, वह दोपहर में घटकर 95.68 मीटर पर आ गई। डिस्चार्ज कम होने से दबाव तो घटा है लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग परेशान हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन की ओर से नाव का इंतजाम कराया गया है।
शुक्रवार से ही गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है। सोमवार को पानी तेजी से बढ़ने लगा और रात में दो बजे वाल्मीकिनगर बैराज से नदी में 339200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे नदी किनारे बसे खड्डा क्षेत्र के मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर आदि गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया है। लोग बाढ़ से बचने के लिए अपने घरों में ही मचान बनाकर खुद को बचाए हुए हैं। परंतु बाढ़ से घिरे इन लोगों को प्रशासन की ओर से केवल आवागमन के लिए नाव की ही प्रबंध कराया गाय है। अब तक राहत सामग्री की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। मरचहवा-बसंतपुर के ग्राम प्रधान इजहार अंसारी व अन्य ग्रामीण बताते हैं कि 10 जुलाई की रात से ही गांव में पानी भरा हुआ है। सोमवार की रात में पानी के चलते घर में भोजन पकाने की दिक्कत हो गई। गांव से निकलने वाली सभी सड़कों पर पानी बह रहा है। लगातार हो रही बारिश ने और दिक्कत बढ़ा दी है।
बालगोविंद छपरा दियारा में कुछ लोग खेती करने गए थे और अचानक पानी बढ़ने के चलते वहीं फंस गए थे उनको मंगलवार की दोपहर में नाव से सुरक्षित बाहर निकाला गया। शिवपुर के प्रधान रामकल्प बताते हैं कि गांव के ज्यादातर घरों में पानी घुस गया है। भोजन सामग्री के अलावा मिट्टी के तेल की कमी से परेशानी हो रही है। शिवपुर पुलिस चौकी के पास पानी बह रहा है। गांव को सोहगीबरवा से जोड़ने वाला मार्ग कई जगह टूट गया है। नाव के अलावा कोई सहायता नहीं मिली है। यही हाल नरायनपुर, हरिहरपुर, बकुलादह, शाहपुर, विंध्याचलपुर आदि का भी है। छितौनी बगहा (पनियहवा) पुल के पास बसे सालिकपुर महादेवा गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। महादेवा के प्रधान जितेन्द्र बताते हैं कि पानी गांव में पहुंच गया है। सड़क पर पानी बहने से आवागमन कठिन हो गया है।
एसडीएम कोमल यादव ने बताया कि गांव में नाव की व्यवस्था कर दी गई है। मिट्टी के तेल के लिए पूर्ति विभाग को पत्र भेजा गया है। खाद्यान्न व अन्य राहत सामग्री के लिए स्थिति का आकलन कराया जा रहा है। बाढ़ ग्रस्त इलाके पर प्रशासन नजर रखे है।
सीमावर्ती इलाके में बिगड़ रहे हालात
तमकुहीरोड। गंडक नदी की बाढ़ के चलते तमकुहीराज क्षेत्र के गांवों के अलावा सीमावर्ती बिहार बार्डर के कई गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। एपी बांध और बिहार के गाइड बांध के साथ किनारे बसे गांवों पर भी खतरा बढ़ने लगा है।
अहिरौलदान के डीह टोला और कचहरी टोला में बाढ़ व कटान से दहशत है। लोग अपने मकान तोड़कर सामान समेत सुरक्षित जगहों पर पलायन करने में जुटे हैं। इस ग्राम पंचायत के छावनी टोला, फागू छापर, खैरटिया, मठिया श्रीराम, छितौनी टोला, लोकनहा सहित अन्य गांवों के लोग भी सहमे हुए हैं। सीमावर्ती बिहार क्षेत्र के गाइड बांध की है, जिस पर गंडक नदी का भारी दबाव बना हुआ है। इसके समीप के गांव भसही, भगवानपुर, काला मटिहिनिया, धर्मपुर, खेम मटिहिनिया, सलेपुर, विसंभरपुर, विशुनपुर सहित कुचायकोट प्रखंड के कई गांवों में गंडक नदी के बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। एसडीएम एआर फारुखी, तहसीलदार रामप्यारे, सीओ संदीप वर्मा, नायब तहसीलदार विकास कुमार सिंह आदि ने एपी तटबंध पर सुरक्षा व बचाव कार्य की जानकारी ली। वहीं गोपालगंज के डीएम अरशद अजीज, एसपी मनोज कुमार तिवारी, सीओ विजय कुमार सिंह आदि ने भी बाढ़ प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया।
घर से खेत तक पानी, फसलें डूबीं
तमकुहीरोड। गंडक नदी में आई बाढ़ के चलते तहसील क्षेत्र के गांव पिपराघाट में लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। घरों में पानी भरा हुआ है और खेत में लगी फसल भी बाढ़ में डूब गई है। कोरोना संकट के चलते पहले ही बेरोजगार हुए इस क्षेत्र के लोगों को अब भुखमरी की आशंका सता रही है।
गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण इससे जुड़ी बांसी नदी भी उफान पर है। शिव टोला, मुसहरी टोला, चौकी टोला, इमिलिया टोला, हनुमान टोला, देवनारायण टोला, रानी गंज, जयपुर, जोगनी, मोती राय टोला, बुटन टोला, गोला घाट, उपाध्याय टोला सहित एपी बांध के जंगलीपट्टी, बिनटोली, चैन पट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, बाक खास, बाघा चौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान के तमाम किसानों की फसल डूब गई है।
किसान पुजारी सिंह, सुधीर यादव, संजय सिंह, बाबूलाल निषाद, जेबी सिंह, पप्पू यादव, ब्रह्मा शर्मा, राजेश यादव, मैनेजर सिंह आदि का कहना है कि बेरोजगार हुए लोगों के लिए खेती ही उम्मीद थी लेकिन बाढ़ में डूब जाने के चलते अब इस पर भी संकट आ गया है।