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बतरौली के युवक की सड़क हादसे में मौत

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बतरौली गांव निवासी शमीम उर्फ बब्लू की मार्ग दुर्घटना में मौत पर विलाप करते परिजन। - फोटो : KUSHINAGAR
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बतरौली के युवक की सड़क हादसे में मौत
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रिश्तेदारी में गोपालगंज जिले के रौतारी गांव गए थे
पत्नी के साथ टहलते समय बाइक की चपेट की चपेट में आ गए थे
अमर उजाला ब्यूरो
कुबेरस्थान। थाना क्षेत्र के बतरौली गांव निवासी शमीम उर्फ बबलू की बिहार के गोपालगंज जिले के रौतारी गांव में सड़क हादसे में मौत हो गई। पत्नी के साथ सड़क के किनारे टहलते समय शुक्रवार की रात करीब आठ बजे वह बाइक की चपेट में आ गए। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। देर रात शव आते ही घर में कोहराम मच गया।
शमीम उर्फ बबलू (40) पुत्र मुश्ताक शुक्रवार को रौतारी गांव में अपने रिश्तेदार के यहां गए थे। रात करीब आठ बजे वह अपनी दूसरी पत्नी शबनम के साथ रौतारी गांव के समीप गोपालगंज-देवरिया मार्ग की पटरी पर टहल रहे थे। इसी दौरान सामने से आई तेज रफ्तार बाइक की चपेट में आ गए। वह सिर के बल गिर पड़े, उनका दाहिना पैर फ्रैक्चर हो गया और उनके सिर में भी गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद बाइकचालक भाग निकला। उसका पता नहीं चल सका। घटना की सूचना पत्नी ने रिश्तेदारों को दी। रिश्तेदार सरकारी एंबुलेंस से शमीम को विजयपुर पीएचसी ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने देवरिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी डॉक्टर ने हालत गंभीर बता शमीम को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। एंबुलेंस से ले जाते समय रात करीब 10 बजे शमीम की रास्ते में मौत हो गई। परिजन रात में ही शव लेकर गांव पहुंचे, जहां उनके परिवार में कोहराम मच गया। शनिवार की देर शाम परिजनों ने शमीम के शव को सुपुर्द ए खाक कर दिया।
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रुदन और चीत्कार से गांव का माहौल गमगीन
एक झटके में दो बीवियां बेवा, बच्चे हो गए अनाथ
शोऐब आलम
कुबेरस्थान। शुक्रवार को शमीम उर्फ बबलू की असमय मौत से उनकी दोनों बीवियां बेवा हो गईं। दोनों के छोटे-छोटे बच्चे अनाथ हो गए। रुदन और चीत्कार से गांव का माहौल गमगीन है।
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बतरौली निवासी शमीम अपने माता-पिता की आठ संतानों में सबसे बड़ा था। उसके चार छोटे भाई तथा तीन बहने हैं। शव घर आते ही भाई-बहन, उसके 70 वर्षीय पिता, मां हदीसुन नेशा के साथ-साथ दोनों बीवियों और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। शमीम के चार छोटे भाई तथा तीनों छोटी बहनों की शादी हो चुकी है। तीनों बहनें अपनी ससुराल में रहती हैं। शमीम के सभी भाई अपने अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं और उसके माता-पिता अपने छोटे बेटे रमजान के साथ रहते हैं। शमीम अपनी दोनों पत्नियों और उनके बच्चों के साथ भाईयों से अलग रहता था। पहली पत्नी आयशा से एक पुत्र तथा तीन पुत्रियां हैं, जिनमें बड़ी पुत्री सूफिया की शादी हो चुकी है। वह अपनी ससुराल में है, जबकि पुत्र सलमान (17) तथा छोटी पुत्री सकरीना (15) व सबेया (13) वर्ष की हैं, जो पढ़ते हैं। उसकी दूसरी पत्नी शबनम से भी दो पुत्र तथा एक पुत्री है। उनमें सबसे बड़ा पुत्र समीर (10) वर्ष, साहिल (8) वर्ष तथा पुत्री गुड़िया अभी छह वर्ष की है और ये तीनो बच्चे भी अभी पढ़ रहे हैं। शमीम ही अपने परिवार का मुखिया था, जो साइकिल मरम्मत करने की दुकान करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करता था। परिवार में आमदनी का और कोई जरिया भी नहीं है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी दयनीय है जिसके चलते पूरा परिवार गांव में ही दो कमरों के पुराने मकान में रहता है। शमीम की सास की तबीयत खराब होने उसे लेकर रौतारी गए थे। पति की मौत से आहत दोनों बीवियों और उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
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