डुमरियागंज क्षेत्र के वासा दरगाह स्थित मजार पर चादर चढ़ाते अकीदतमंद। संवाद
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भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के वासा दरगाह स्थित मजार पर सोमवार को 596 वां उर्स हजरत मखदूम सैयद शाह निजामुद्दीन केनानी का सालाना उर्स मनाया गया। सुबह से ही अकीदतमंदों का मजार पर आवागमन शुरू हो गया। हर धर्म के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
मजार पर लोगों ने चादर चढ़ाकर अपनी मिन्नतें मांगीं। हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बाबा की मजार पर लगे मेला का लोगों ने आनंद उठाया। मेला आयोजक मदनी ने बताया कि कुल शरीफ की शुरुआत सुबह 11 बजे महफिल-ए-सिमा नमाज ईशा के बाद दरगाह में हुई। जानकारों के मुताबिक यहां जो वली हैं उनका नाम हजरत मखदूम सैय्यद शाह हिसामुद्दीन औलिया है। वह केनान से लगभग 650 साल पहले बर्र-ए-सगीर (भारत) आए थे। यह उर्स कई सौ साल से मनाया जा रहा है। लोगों के अनुसार यहां पर जो भी मन्नतें मांगी जाती है, वह पूरी होती है। यहां उत्तराखंड से आए कव्वाल ने अपने आवाज से लोगों के बीच समा बांध दिया। इस अवसर पर काजी सुहेल अहमद, काजी अमजद मुख्तार, काजी सईद, इमरान लतीफ, शमीम, मोहम्मद मदनी आदि मौजूद रहे। भवानीगंज थानाध्यक्ष बृजेश सिंह पुलिस बल के साथ उर्स की निगरानी में मौजूद रहे।