पडरौना। जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज के नाम पर मरीजों की भीड़ बढ़ी है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं जस की तस हैं। मरीजों की संख्या के अनुपात में संसाधन और विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी से परेशानी बढ़ गई है। गंभीर मामलों में आज भी मरीजों की जांच नहीं हो पाती और उन्हें बड़े शहरों के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था इस कदर हावी है कि मरीजों को डॉक्टर से दिखाने और परामर्श के बाद उपलब्ध जांच कराने में ही दिन गुजर जा रहा है। दवाओं के लिए दूसरे दिन आना पड़ रहा है। दवा काउंटर पर लंबी कतारें लग रही हैं। सुबह से लाइन में खड़े मरीज को घंटों इंतजार के बाद उसकी बारी आती है। वहीं, बैठने के लिए कोई बेहतर प्रबंध नहीं है। इसके चलते मरीज भटकते रहते हैं। दूर-दराज इलाके से आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जांच के बाद उसकी रिपोर्ट मिलने में देरी के चलते डाॅक्टर को दिखाने के लिए दूसरे दिन आना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी के साथ ही जेब भी ढीली हो रही है।
0
कोट
-जांच और इलाज की सुविधा के लिए उपकरण की डिमांड की गई है। नई बिल्डिंग में ऑपरेशन और इलाज की व्यवस्था शिफ्ट जल्द कर दी जाएगी। इसके बाद मरीजों काे सुचारु रूप से इलाज मिलना शुरू हो जाएगा। इलाज में जिन मरीजों को परेशानी होती है। उनका समाधान कराया जाता है। अधिक भीड़ के चलते उसी दिन जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। जल्द ही व्यवस्था में सुधार हो जाएगा। -डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
0
संसाधनों का टोटा, मरीजों की लंबी कतारें
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। ओपीडी में मरीजों का दबाव बढ़ गया है। बेड और डाक्टरों की संख्या को लेकर स्थिति ठीक नहीं है। पैथोलॉजी जांच से लेकर एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
0
मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीज बोले:-
हमें लगा था कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद बड़े डाक्टर यहीं मिल जाएंगे। चोट लगने से सीने में दर्द था, लेकिन यहां के डाक्टर ने बिना जांच कराए ही दवा लिख दी है। अगर पूरी जांच भी नहीं हो पाए तो मेडिकल कॉलेज बनने का कोई फायदा होता नहीं दिखाई दे रहा है। -सुरेंद्र कुमार, पडरौना
0
दवा के लिए सुबह से ही लाइन में खड़ा हूं। दोपहर बाद भी अब तक मेरी बारी नहीं आई है। मरीजों की भीड़ इतनी बढ़ गई है कि पैर रखने की जगह नहीं है और बैठने के लिए बेंच तक कम पड़ रही हैं। मरीज यहां आकर और बीमार हो जाएगा। - मुन्ना कुमार, तमकुहीरोड
0
मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा नहीं
करोड़ों रुपये खर्च कर जिला अस्पताल को अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज बना तो दिया गया है, लेकिन आज भी यहां गंभीर मरीजों की जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे मरीजों को बाहर अथवा गोरखपुर जांच करानी पड़ती है। इससे मरीजों को परेशानी होती है। जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में थायराइड जांच की सुविधा नहीं होने से मरीजों को बाहर जांच करानी पड़ती है। एमआरआई मशीन नहीं है। खून के सैंपल से होने वाली गांठ की जांच (एफएनएसी), ईको, मेजर सर्जरी के लिए उपकरणों का अभाव है। दूरबीन विधि से सर्जरी की सुविधा नहीं है व छाती से पानी निकालकर जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं है। एक मरीज ने बताया कि डिजिटल एक्स-रे में फिल्म बचाई जाती है। मरीजों के मोबाइल पर ही फिल्म भेजी जाती है।
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में मरीजों को देखते चिकित्सक।संवाद