सुकरौली। क्षेत्र में पराली जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम पराली जलाई जा रही है। मंगलवार की रात क्षेत्र के करीब 15 स्थानों पर आबादी के बीच पराली जलाई गई, जिससे आगलगी का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों में इसको लेकर भय और नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पराली जलाने से न सिर्फ आग फैलने का खतरा रहता है, बल्कि इससे वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। आबादी के बीच इस तरह आग जलाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इस पर रोक लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। बताया जा रहा है कि कृषि विभाग की ओर से किसानों को पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक नहीं किया गया। वैकल्पिक उपाय के बारे में जानकारी दी जा जा रही है। किसान अब भी पुराने तरीके अपनाने को मजबूर हैं।
वहीं प्रशासन की उदासीनता भी इस समस्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। क्षेत्र में न तो कोई निगरानी अभियान चलाया जा रहा है और न ही पराली जलाने वालों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि उप निदेशक कृषि अतिंद्र सिंह द्वारा पराली प्रबंधन को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है, लेकिन उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की लापरवाही के चलते इसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।
इस संबंध में एडीओ एजी प्रवीण ओझा ने बताया कि समय-समय पर विभागीय निर्देश पर बैठक आयोजित कर जागरूकता अभियान चलाई जाती है। जांच पड़ताल कर आवश्यक कार्रवाई होगी।
कुशीनगर में डंठल जलाने के 74 मामले, किसानों की संलिप्तता नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले में फसल अवशेष जलाने के मामले में लगातार सामने आ रहे हैं। इस वर्ष अब तक फसल अवशेष जलाने के 74 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष 200 मामले दर्ज हुए थे। हालांकि, विभागीय जांच में फसल अवशेष जलाने में किसी भी किसान की संलिप्तता नहीं मिली। इस वर्ष अब तक डंठल जलने के सभी मामले किसी दूसरी वजह से हुए हैं। इसके चलते किसानों पर कार्रवाई नहीं हुई।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के तहत फसल अवशेष जलाना दंडनीय घोषित किया गया है। सेटेलाइट के माध्यम से इसकी सतत निगरानी की जा रही है। फसल अवशेष जलाने पर संबंधित खेत का विवरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों से 2500, दो से पांच एकड़ तक 5000 और पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15,000 प्रति घटना अर्थदंड निर्धारित किया गया है। उप निदेशक कृषि अतींद्र ने बताया कि सेटेलाइट के जरिए वर्ष 2026-27 में अब तक जिले में फसल अवशेष जलाने के 74 मामले दर्ज किए हैं। पिछले वर्ष 200 मामले दर्ज हुए थे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक हुई डंठल जलाने की घटनाओं की जांच कराई गई तो उसमें किसानों की संलिपप्ता नहीं मिली है। आगलगी की घटनाएं बिजली तार में शॉर्ट सर्किट अथवा अन्य कारणों से हुई हैं। इसलिए इस वर्ष अब तक किसी भी किसान पर जुर्माने की कार्रवाई नहीं हुई है।
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गन्ने की सिंचाई के दौरान पंपिंग सेट से निकली चिंगारी से लगी आग
पडरौना। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के गोईती बुजुर्ग के सबया आबादकारी टोला में मंगलवार की दोपहर सिंचाई के लिए चल रहे पंपिंग सेट के साइलेंसर से निकली चिंगारी से पास में रखी सूखी गन्ने की पत्तियों में आग लग गई। हवा तेज होने के चलते पास के गेहूं के खेत में आग लग गई। पांच लोगों के खेत में तैयार गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई।
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बिजली की शॉर्ट सर्किट से लगी आग
पडरौना। हाटा तहसील क्षेत्र के मथौली नगर पंचायत के वार्ड नंबर चार पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पश्चिम दिशा में बीते शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे खेत से गुजर रहे हाई टेंशन बिजली के तार से निकली चिन्गारी से गेहूं के खेत में आग लग गई। जब तक लोगों को खेत में आग लगने की जानकारी हुई तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। लोवों ने काफी प्रयास के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक राम बेलास सिंह, सतेंद्र सिंह, खूबलाल सिंह, जयप्रकाश सिंह, योगेंद्र सिंह, बैजनाथ मल्ल, शंभू मल्ल, अनिरुद्ध मल्ल आदि की गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई।