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तस्करों ने तैयार किया घुसपैठ का रास्ता

Wed, 06 Jul 2016 10:24 PM IST
kushinagar
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अपराध् - फोटो : santosh verma
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खड्डा। भारत-नेपाल सीमा स्थित वाल्मीकिनगर क्षेत्र की विषम परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए तस्करों ने आवागमन का जो रास्ता खोजा है वह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। गंडक नदी और जंगल के बीच से होकर गुजर रहे इन रास्तों का प्रयोग कर देश विरोधी ताकतें बड़ी आसानी से कुशीनगर जिले के छितौनी-बगहा रेलपुल तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, इस इलाके में एसएसबी (सशस्त्र सुरक्षा बल) की एक यूनिट कार्यरत है लेकिन संसाधनों का अभाव झेल रहे ये जवान खुद की सुरक्षा को लेकर ही चिंतित हैं।
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नेपाल से निकलकर भारत की सीमा में प्रवेश कर रही गंडक नदी के दोनों किनारे प्राकृतिक जंगल है। बीच-बीच में गांव भी आबाद हैं। नदी के एक छोर पर बसे नेपाल देश के गांव सुस्ता, अवरहवा, रानीगंज, सखुअनवा आदि बड़े अपराधियों और तस्करों की शरणस्थली हैं। वहां से साधू चौक होकर कुशीनगर जिले के हरिहरपुर, नरायनपुर, मरचहवा होते हुए शाहपुर के रास्ते सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग 28 बी स्थित छितौनी-बगहा रेल पुल तक पहुंचा जा सकता है।

सीमा के करीब महराजगंज के गहनू घाट और टेलफाल के पास से गंडक नदी का इस्तेमाल करके भी बड़ी आसानी से कुशीनगर जिले के खड्डा थाना क्षेत्र में पहुंचा जा सकता है। जंगल डकैतों से लेकर तस्कर तक बराबर इन रास्तों का इस्तेमाल करते रहते हैं। इस रास्ते नेपाल से शराब की तस्करी का धंधा चल रहा है। तस्करों ने इसके लिए बाकायदा नदी के किनारे तक रास्ता भी बना दिया है। कुछ दिन पहले कुशीनगर पुलिस ने नेपाली शराब की जो बड़ी खेप पकड़ी थी, वह इसी रास्ते ले आई गई थी। 
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नेपाल के रानीगंज के पास से बी गैप बंधा सीधे नेपाल के रतनगंज से महराजगंज जिले के पथलहवा हेड तक आता है। यह स्थान कुशीनगर जनपद की सीमा के करीब है। चार पहिया वाहन या बाइक से पथलहवा हेड तक पहुंचने में बमुश्किल 30-40 मिनट का समय लगता है। पथलहवा में एसएसबी का बार्डर आउट पोस्ट तो है, लेकिन भौगोलिक दिक्कतों के चलते गैरकानूनी काम करने वालों पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा भी नेपाल से यूपी सीमा में प्रवेश के तीन रास्ते हैं, लेकिन निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा जंगल से होकर गुजरने वाली कई पगडंडियां भी हैं जिनका इस्तेमाल कर आसानी से महराजगंज जिले के निचलौल सहित अन्य हिस्सों में पहुंचा जा सकता है। कलनही बांध के रास्ते सीधे खड्डा क्षेत्र के मदनपुर गांव के पास पहुंच सकते हैं। यहां से छितौनी बांध का इस्तेमाल कर जनपद के किसी भी हिस्से में आना-जाना आसान है। यह बात अब किसी से छिपी नहीं रही कि नेपाल के इन सीमावर्ती रास्तों का उपयोग पूर्व में भी तस्कर और आपराधिक गिरोह के लोग भारत में प्रवेश करने तथा आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए करते रहे हैं।   

संसाधन विहीन है एसएसबी कैंप
खड्डा। नेपाल सीमा की निगरानी के लिए बना पथलहवा एसएसबी पोस्ट मूलभूत सुविधाओं को लेकर जूझ रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि अगर देश की सीमा की रखवाली का जज्बा नहीं होता तो यहां एक दिन भी रुकना मुश्किल है। गंडक नदी के किनारे स्थित इस पोस्ट पर तैनात जवानों के लिए शुद्ध पानी तक का इंतजाम नहीं है। यहां मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं करता। कभी-कभार बिहार का लोकेशन मिलने पर ही जवान मोबाइल का उपयोग कर पाते हैं। किसी के बीमार पड़ने पर यहां से जवानों को महराजगंज जिले के निचलौल या कुशीनगर के खड्डा कस्बे तक आना पड़ता है। जनरेटर और सोलर लाइट की व्यवस्था भी पर्याप्त न होने से रात में बड़ी दिक्कत आती है। एक पुरानी बाइक और एक मालवाहक गाड़ी यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। गंडक नदी में बाढ़ आने पर जवानों को भी पोस्ट छोड़कर बंधे पर शरण लेनी पड़ती है। 

कोट
यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के चलते कुछ दिक्कत आती है। परंतु एसएसबी का नेटवर्क मजबूत है और बॉर्डर पर दिखने वाले लोगों के विषय में पूरी जानकारी रखी जाती है। संदिग्ध व्यक्तियों के इलाके में प्रवेश करते ही सारी सूचना तुरंत मिल जाएगी। देश की सुरक्षा के लिए एसएसबी पूरी तरह से सतर्क है।
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-विनोद कुमार, चेक पोस्ट प्रभारी, पथलहवा।
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