पडरौना। जिले में पशु मैत्री चयन का मामला और भी संदिग्ध होता जा रहा है। अपर निदेशक के सख्त निर्देश के बावजूद संबंधित पटल सहायक ने उन्हें चयन से संबंधित साक्ष्य और अभिलेख शनिवार को भी उपलब्ध नहीं कराया। एडी ने माना कि चयन प्रक्रिया संदिग्ध मालूम पड़ रही है। यदि इस बारे में संबंधित अधिकारी-कर्मचारी साक्ष्य नहीं उपलबध कराते हैं तो पशु मैत्री की चयन सूची निरस्त कर पुन: नए सिरे से यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
पैरावेट पशु मित्रों की तर्ज पर जिले में पशु मैत्री का चयन करने के लिए अभ्यर्थियों से आवेदन लिया गया था। हाईस्कूल विज्ञान के अभ्यर्थी इसके लिए अर्ह थे, लेकिन इंटर विज्ञान के अभ्यर्थियों को इसमें वरीयता दी जानी थी। अभ्यर्थियों से आवेदन लेने के बाद 12 अगस्त को दस पदों पर पशु मैत्री का चयन कर लिया गया था।
सपा लोहिया वाहिनी के नेता चंद्रशेखर यादव की तरफ से मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत करने के बाद जांच का आदेश हुआ था। शिकायतकर्ता और विभागीय पक्ष जानने के लिए पशुपालन विभाग गोरखपुर के अपर निदेशक डॉ. केपी सिंह शुक्रवार को जनपद मुख्यालय पर पहुंचे थे। उन्होंने विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कक्ष में शिकायतकर्ता और विभागीय साक्ष्य के लिए दोनों पक्षों को बुलाया था। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भगवान सिंह की मौजूदगी में एडी ने सपा नेता के साक्ष्य और बयान तो ले लिया, लेकिन संबधित पटल सहायक नहीं पहुंचे। उन्हें शनिवार को एडी कार्यालय पहुंचकर सबूत पेश करने के लिए निर्देश दिया गया था। एडी अपने दफ्तर में पटल सहायक का इंतजार करते रह गए, पर वह नहीं पहुंचे।
इस संबंध में अपर निदेशक डॉ. केपी सिंह का कहना था कि पटल सहायक को साक्ष्य के साथ आना था, लेकिन वह नहीं आए। इस तरह की आना कानी से पशु मैत्री चयन प्रक्रिया संदिग्ध महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि पटल सहायक और संबंधित अधिकारी की तरफ से साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो चयन सूची निरस्त कर नए सिरे से चयन प्रक्रिया अपनाई पड़ेगी।