पिपरा बाजार (कुशीनगर)। शुक्रवार की दोपहर खजुरिया गांव के टोला (एक) के खलिहान से उठी आग ने 100 से अधिक घरों को चपेट में ले लिया। आग लगने के कारण का पता नहीं चल सका। चिलचिलाती धूप और तेज हवा के थपेड़ों की वजह से आग पर काबू पाने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस घटना में एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति नष्ट होने का अनुमान है।
नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के खजुरिया गांव के टोला संख्या (एक) में लगभग 500 घर हैं। गांव के उत्तर-पश्चिम कोने में खलिहान है, जहां लोगों ने अपना पुआल, सूखी पत्तियां, गेहूं, भूसा आदि रखा है। शुक्रवार को दिन के लगभग सवा एक बजे खलिहान में अचानक आग लग गई। चिलचिलाती धूप और तेज हवा के कारण देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं। शोर होने पर गांव के लोग दौड़ पड़े।
तमाम कोशिश के बावजूद आग नियंत्रण से बाहर हो गई थी। आग की चपेट में आने से रामचंद्र गोंड, सत्य नारायण शर्मा, संपत चौहान, रामाश्रय शर्मा, बिजली गोंड, किशोरी चौहान, गोबरी जायसवाल, मल्लू चौहान, दल चौहान, जयकिशुन, घूरा चौहान, रमेश शर्मा, दसई चौहान, लल्लन चौहान, पृथ्वीनाथ गोंड, बुन्नी चौहान, गंगा चौहान, सागर चौहान, राजेंद्र गुप्त, नागेंद्र गुप्त, कमलेश शर्मा, दिनेश शर्मा, गणेश शर्मा, उमेश शर्मा, पुजारी चौहान, पलटू चौहान, जवाहर गोंड, जिउत गोंड, महंती गोंड, रामअवध गोंड, रामप्रीत, प्रमोद, रमाशंकर, रामअवध, रामजीत, अमरीका, जिउत चौहान, वंशी सहित 100 से अधिक लोगों के घर जल गए।
आग की लपटों से डॉ. धीरेंद्र राय, महाचंद्र, अभय, अंकुर राय, मस्तराज राय, जितेश्वर राय आदि के पक्के मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। घरों के फाटक, खिड़कियां, चौखट धू-धूकर जलते नजर आ रहे थे। चार पंपिंग सेट, दो दर्जन हैंडपंप और नालियों के पानी का भी इस्तेमाल करने के बावजूद आग भड़कने का क्रम जारी रहा। भयभीत लोगों ने अपने घरों में रखे कपड़े, फ र्नीचर, बिस्तर, मवेशियों और वाहनों को गांव से बाहर दूर खेतों में रख दिया ताकि उन्हें नष्ट होने से बचाया जा सके।
ईंधन के रूप में इस्तेमाल के लिए घरों में रखे उपले और लकड़ियों की वजह से आग पर नियंत्रण करने में लोगों को काफ ी मुश्किल हुई। सूचना देने के करीब डेढ़ घंटे बाद फायर ब्रिगेड के पहुंचने तक घरों में लगी आग पूरी तरह शांत नहीं हो सकी थी। अगिभनशमन दस्ता भी आग बुझाने में जुट गया। शाम तक राजस्व विभाग के कर्मचारी भी खजुरिया गांव में पहुंच गए थे। आग में अपनी गृहस्थी के सभी सामान गंवा चुके परिवारों में चीख-पुकार मची रही।