खड्डा। पनियहवा पुल पर नक्सली खतरे की आशंका की वजह से खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। पूर्व में पुल को उड़ाने की मिली धमकी के बाद से ही यूपी-बिहार को जोड़ने वाले गंडक नदी के इस पुल व रेल लाइन की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। हाल के दिनों में यूपी-बिहार के सीमावर्ती इलाकों में नक्सली गतिविधियों के बढ़ने व चुनाव को देखते हुए आरपीएफ को विशेष चौकसी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जनपद से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगलों, गंडक दियारा, थारू जनजाति इलाके, नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सली संगठन अपना पैर जमा चुके हैं। हाल के दिनों में बगहा इलाके में एक मुखिया की हत्या सहित ताबड़तोड कई नक्सली वारदात व इनके हार्डकोर सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है। इसके चलते बड़ी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पुल को नुकसान पहुंचा नक्सली अपनी बड़ी हनक दिखाने का दुस्साहस कर सकते हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्रो के मुताबिक वर्ष 2008 में इस पुल को उड़ाने की नक्सली धमकी के बाद से ही खतरा बना हुआ है। सुरक्षा के विशेष इंतजाम हेतु रेलवे सुरक्षा में लगे लोगों को आगाह किया गया है। नक्सलियों से कई बार लोहा ले चुके बिहार पुलिस के एक डीएसपी ने बताया कि पनियहवा पुल हमेशा से नक्सलियों के निशाने पर रहा है। इस समय जंगल में स्थानीय नक्सलियों के साथ बाहर से बड़े नक्सलियों का जमावड़ा हो रहा है। चुनाव को देखते हुए बड़ी वारदात से इनकार नहीं किया जा सकता हैं। आरपीएफ के इंसपेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि पुल की सुरक्षा के लिए रेलवे के आईजी के जरिए विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश मिला है। निर्देश के क्रम में चौकसी बरती जा रही है।