पडरौना। लखनऊ अग्निकांड के बाद देहात से शहर तक चल रहे अवैध व असुरक्षित कोचिंग सेंटरों की जांच-पड़ताल तेज हो गई है। कोचिंग सेंटर के मानकों को परखा जा रहा है। इसके लिए पांच विभागों के जिम्मेदार जुटे हुए हैं। इस पूरी कार्रवाई में अब तक अग्निशमन विभाग के जिम्मेदारों के पास कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है कि शहर से देहात तक कितने कोचिंग सेंटर व बेसमेंट में संचालित संस्थानों को एनओसी जारी किया गया है।
लखनऊ अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद जिला प्रशासन जिम्मेदारों ने मानकों की जांच करने के लिए संचालित कोचिंग संस्थानों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं औषधि, शिक्षा विभाग, अग्निशमन व तहसील प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों का दौरा कर मानक व सुरक्षा बंदोबस्त का जायजा लिया गया। संचालित संस्थानों की सूची तैयार की गई। हालांकि, मानकों की अनदेखी चल रहे किसी कोचिंग संस्थान के विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हैरानी की बात यह है कि अग्निशमन विभाग के पास यह आंकड़ा ही उपलब्ध नहीं है कि जिले में कहां और कितने कोचिंग संस्थान हैं, जिन्हें एनओसी जारी किया गया है।
जानकारों का कहना है कि कोचिंग संचालक भी बच्चों के सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर बेपरवाह हैं। मनमाने तरीके से घनी आबादी व गलियों के बीच किराए पर भवन लेकर मानक विहीन कमरों में कोचिंग संस्थान चला रहे हैं। उन्हें बच्चों के जीवन से कोई-लेना देना नहीं है। उन्हें सिर्फ मोटी कमाई से ही मतलब है। इस तरह मानक विहीन व बिना सुरक्षा बंदोबस्त के संचालित कोचिंग संस्थानों की कुशीनगर, कसया, हाटा, कप्तानगंज, फाजिलनगर, पडरौना शहर की संकरी गलियों के बीच संचालित हो रहे हैं।
कोट:
कोचिंग संस्थानों के मानकों की जांच के लिए पांच विभागों के अधिकारियों को लगाया गया है। जहां कमियां मिल रही हैं, उसे पूरा कराया जा रहा है। जरूरत के अनुसार नोटिस भी जारी किया गया जा रहा है। -वैभव मिश्रा, एडीएम प्रशासन
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