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जहां लोग वहां वैक्सीन नहीं, जहां वैक्सीन वहां लोग तैयार नहीं

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जहां लोग वहां वैक्सीन नहीं, जहां वैक्सीन वहां लोग तैयार नहीं
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- कोरोना को हराने वाला अचूक उपाय रणनीति के अभाव में नहीं हो पा रहा सफल
- गांवों में अभी भी टीके को लेकर तमाम तरह की अफवाह है
- स्वास्थ्य महकमा भी बिना किसी रणनीति के ही युद्ध जीतने का कर रहा है दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
पकड़ियार बाजार (कुशीनगर)। कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए टीकाकरण ही सबसे बड़ा ढाल बताया जा रहा है। लेकिन इस ढाल का प्रयोग करते समय हो रही रणनीतिक चूक भारी पड़ सकती है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में टीकाकरण करने पहुंच रही टीम के पास कोई कार्ययोजना ही नहीं है। गांव में जो मिला उसे टीका लगाया और कुछ जरूरी औपचारिकता निभाकर वापस लौट आना किसी अभियान का हिस्सा नहीं हो सकता है। इतनी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए ठोस रणनीति जरूरी है। शनिवार को नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के मड़ार विंदवलिया गांव में कोविड टीकाकरण की हकीकत देखी गई। यहां भी पहले जैसी ही स्थिति नजर आई। एक केंद्र पर लोग थे तो टीका कम पड़ गया और दूसरे केंद्र पर टीका तो था लेकिन लोग टीकाकरण के लिए तैयार नहीं थे। नतीजा वही कि आधे से अधिक लोग बिना टीकाकरण के ही बच गए।
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के मड़ार विंदवलिया ग्राम सभा की आबादी 15 हजार से अधिक है। 36 टोले वाले इस गांव दूबे बरवा टोले के उप केन्द्र पर शनिवार को कैंप लगा था। यहां केवल 50 लोगों के ही टीकाकरण का लक्ष्य था। एक हजार से अधिक आबादी वाले इस टोले पर 200 से ज्यादे लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है। टीकाकरण सुबह 10 बजे से शुरू हुआ तो कुछ ही देर में वहां भीड़ जुट गई। टीम ने दोपहर दो बजे तक 50 लोगों का टीकाकरण किया। इसके बाद आए लोगों को अगले दिन आने के लिए कहा जा रहा था। वहीं कैंप से वापस लौट रहे लोग इस पर अपनी नाराजगी जता रहे थे। एएनएम शशिकला सिंह ने बताया कि केवल 50 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य मिला था जो पूरा हो गया है। शेष लोगों को कल टीका लगाया जाएगा।
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इसी गांव के दुर्गा टोले के प्राथमिक विद्यालय पर भी टीकाकरण कैंप था। टीम सुबह 10 बजे ही पहुंच गई थी। यहां कोविशिल्ड की 50 डोज लगाई जानी थी, लेकिन दोपहर बाद तीन बजे तक मात्र 11 लोगों को ही टीका लग पाया था। स्वास्थ्यकर्मी सूरज सिंह का कहना था कि आशा कार्यकर्ता गांव में कई बार जाकर लोगों को कह चुकी हैं, लेकिन लोग टीका लगवाने नहीं आ रहे हैं। काफी समझाने के बाद कुछ लोग तैयार हुए हैं। इस केन्द्र के बगल में ही स्थित मुसहर बस्ती के लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था लेकिन वे कोई बात सुनने को तैयार नहीं थे। इस टोले मे मुसहरों के 80 घर हैं लेकिन एक भी व्यक्ति ने टीका नहीं लगवाया।
टीकाकरण के लिए बनानी होगी मजबूत कार्ययोजना
इस गांव के आशुतोष पांडेय टीकाकरण करा चुके हैं। इनका कहना था कि स्वास्थ्य विभाग के पास टीकाकरण को लेकर कोई मजबूत कार्ययोजना नहीं है। टीका को लेकर अधिकांश लोगों के मन में सकारात्मक भाव है। परंतु पहले से सूचना नहीं मिलने के चलते तमाम लोग कैंप में नहीं पहुंचा रहे हैं।
नवीन दूबे का कहना है कि टीकाकरण को लेकर अब तक बहुत सी जानकारी लोगों को मिल चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य टीम के पास टीकाकरण के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं है। जहां जरूरत है वहां कैंप नहीं लग रहा है।
सेवा निवृत्त शिक्षक फेंकू कुशवाहा का कहना था कि टीकाकरण कार्य के लिए स्वास्थ्य टीम को कुछ और मूलभूत जानकारी जुटाकर मजबूत रणनीति बनानी होगी। ऐसा प्रयास हो कि जिस गांव में जाएं वहां की करीब 60 फीसदी आबादी का टीकाकरण हो जाए।
सौरहा खुर्द के प्रधान डॉ. शम्भु गुप्ता का कहना है की गांव के लोगों का भ्रम तोड़ने के लिए ग्राम प्रधान, बीडीसी व ग्राम पंचायत सदस्य तथा अन्य पढ़े लिखे लोग आगे आकर खुद टीका लगवाएं जिससे कि अन्य लोग भ्रमित न होने पाएं। आज की सतर्कता ही कल की दिक्कत को खत्म करेगी।
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हमने लगवाया टीका, इसलिए हैं सुरक्षित
पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के ग्राम सभा देवतहा बाली निवासी प्रमहंश पांडेय ने मार्च में ही टीके की प्रथम डोज लगवाई थी। टीकाकरण के 20 दिन बाद बुखार हुआ तो जांच में कोरोना पॉजिटिव मिला। घर पर ही रह कर घरेलू और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बताई गई दवाइयों का उपयोग कर ठीक हो गए। ज्यादा परेशानी भी नहीं हुई न सांस लेने में दिक्कत आई। पूर्व में टीका लगा होने से ही जीवन बच गया। अब वह घर पर हैं और गांव के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए अपील भी कर रहे हैं।
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