पडरौना। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कुशीनगर की निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार का मामला तूल पकड़ रहा है। जिले के पांच जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा सत्र के दौरान ही प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक को पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की।
उपमुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (एसीएस) चिकित्सा शिक्षा से पूरी पत्रावली आख्या सहित तलब की है। आरोप है कि गोरखपुर की एक फर्म का मेडिकल कॉलेज में सिक्का चलता था। अधिकतर उपकरणों की खरीद उसी फर्म से की जाती रही। पूर्व में भी फर्म संचालक पर आरोप लग चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बताया जा रहा है कि कुशीनगर में निविदा की शर्तों के अनुसार 80 प्रतिशत लागत (लगभग 9.27 करोड़ रुपये) का एक कार्य, 50 प्रतिशत लागत के दो कार्य, या 40 प्रतिशत लागत के तीन कार्य पूर्ण किए जाने थे।
इन शर्तों का उद्देश्य सक्षम एवं अनुभवी फर्म का चयन करना था। आरोप है कि संबंधित फर्म की ओर से कोई भी कार्य निर्धारित सीमा मेंं नहीं किया गया। अधिकतर कार्यादेश लगभग एक करोड़ रुपये के थे।
सूत्रों ने बताया कि एक 9.59 करोड़ रुपये का जेम (GeM) ऑर्डर प्रस्तुत किया गया, जो फरवरी 2024 से फरवरी 2026 तक का है और अभी अपूर्ण है। नियमों के अनुसार, केवल पूर्ण कार्य ही अनुभव के रूप में मान्य होते हैं। इसके बावजूद अपूर्ण कार्य को स्वीकार कर फर्म को पात्र घोषित कर दिया गया। इसे निविदा शर्तों का उल्लंघन बताया जा रहा है। इसके अलावा निविदा शर्तों में फर्म के सभी निदेशकों एवं पार्टनरों का चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य था।
सूत्रों के मुताबिक इन सभी विषयों पर उपमुख्यमंत्री को जानकारी दी गई है। संबंधित फर्म में चार पार्टनर होने के बावजूद केवल एक का ही प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया।
मुख्य लीड पार्टनर समेत अन्य का प्रमाण पत्र नहीं लगाया गया। इसके बावजूद फर्म को तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया। यह नियमों की जानबूझकर अनदेखी है।