सोशल मीडिया पर भी नियंत्रण जरूरी, लेकिन मनमानी न हो
कुछ लोग इसे समाजहित में जरूरी बता रहे हैं तो कुछ कानून के दुरुपयोग की जता रहे आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना (कुशीनगर)। सोशल मीडिया पर सख्ती के लिए सरकार की तरफ से जारी आदेश को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोग जहां नए कानून से सोशल मीडिया की बुराइयों पर अंकुश लगने की बात कह रहे हैं तो वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो इसे सरकार द्वारा अपने विरोध में उठने वाली आवाज को नियंत्रित करने का प्रयास बता रहा है।
मारवाड़ी युवा मंच की चेतना महिला शाखा की अध्यक्ष मीनू जिंदल ने कहा कि सोशल मीडिया आज की तारीख में संपर्क का सबसे सशक्त व तेज माध्यम है। परंतु कुछ लोग इसका प्रयोग महिलाओं को अपमानित करने के लिए करते हैं। आपत्तिजनक पोस्ट डालते हैं। नए कानून से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने और दोषियों को सजा दिलाने में मददगार होगा।
उदित नारायण इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मेजर जगमोहन तिवारी ने कहा कि स्वस्थ्य समाज की स्थापना के लिए स्वस्थ मानसिकता और स्वस्थ विचार की जरूरत होती है। सोशल मीडिया विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है। परंतु कुछ लोग इसका प्रयोग समाज में वैमनस्यता व द्वेष फैलाने के लिए भी करते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए नियम होना आवश्यक है।
पिपरावर सीवान गांव निवासी राकेश मोहन ने कहा कि सरकार संविधान में मिले अभिव्यक्ति के अधिकार को भी कानून के दायरे में लाकर अपने आलोचनाओं पर नियंत्रण करना चाहती है। सोशल साइट्स लोगों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का सरल माध्यम है। यह नियम लागू होने से अभिव्यिक्त की आजादी पर अंकुश लगेगा।
जियनपुर गांव निवासी मनीष कुमार का कहना है कि तकनीकी के विकास ने सोशल मीडिया को बहुत ताकतवर बनाया है। सरकार और राजनीतिक दल भी इसका उपयोग करते रहते हैं। हर व्यवस्था में अच्छाई और बुराई दोनों होती है। सरकार सोशल मीडिया के आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई करे तो यह स्वागत योग्य है, लेकिन उसके आड़ में आलोचना करने वालों पर कार्रवाई न हो इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।