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बड़ी गंडक पर बंधे का निर्माण शुरू

Sun, 23 Apr 2017 11:57 PM IST
कुशीनगर (ब्यूरो)
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बड़ी गंडक पर बंधे का निर्माण शुरू - फोटो : अमर उजाला
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तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी के कटान से अहिरौलीदान और सीमावर्ती बिहार के गांवों को बचाने के लिए बिहार के जल संसाधन विभाग ने 62.8 करोड़ रुपये की लागत से 8.2 किलोमीटर लंबे बांध का निर्माण शुरू कर दिया है। इसके लिए फरवरी में ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई थी और नौ गांवों के 298 किसानों की भूमि सरकारी दर पर अधिग्रहित की गई थी।
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उत्तर प्रदेश शासन की ओर से पिपराघाट से अहिरौलीदान तक बड़ी गंडक नदी के किनारे 17 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण कराया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा समाप्त होने के बाद गंडक नदी के किनारे बांध न होने से हर साल मानसून सत्र में बिहार के सौ से अधिक गांवों पर बाढ़ और कटान का खतरा मंडराने लगता है। बाढ़ आने पर इन गांवों में रहने वाले लोगों को काफी तबाही झेलनी पड़ती है। इसे लेकर बिहार के जल संसाधन विभाग ने तीन माह पहले एक कार्ययोजना तैयार की थी और 62.8 करोड़ रुपये की लागत से 8.2 किलोमीटर लंबे बांध के निर्माण को मंजूरी दी थी। उसके लिए 11 से 17 फरवरी के बीच ऑनलाइन टेंडर भरा गया था। 21 फरवरी को टेंडर खोला गया। उसके बाद 13 अप्रैल से बांध निर्माण का कार्य अहिरौलीदान-एपी तटबंध के अंतिम छोर से शुरू कर दिया गया है। इस बांध के निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग ने नौ गांवों के 298 किसानों से सरकारी दर पर भूमि अधिग्रहण भी किया था। नौ दिन में ही लगभग दो किलोमीटर लंबाई में मिट्टी भराई का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस बांध के निर्माण को लेकर एक महीने से ज्यादा दिन तक आंदोलन करने वाले गोपालगंज के जिला पार्षद अनिल माझी कहते हैं कि अहिरौलीदान से विशुनपुरा तक निर्माणाधीन 8.2 किलोमीटर लंबे बांध का निर्माण हो जाने से बड़ी गंडक नदी के मुहाने पर आ चुके बिहार के नौ गांवों शलैपुर, काली मटिहनिया, खेम मटिहनिया, धर्मपुर, भगवानपुर, बरईपट्टी, गंभीरपुर, विशंभरपुर, विशुनपुर सहित सैकड़ों गांवों को बाढ़ की विभीषिका से बचाया जा सकेगा। अहिरौलीदान के जेके सिंह, जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, क्षेत्र पंचायत सदस्य ईश्वरचंद्र गुप्ता, धुरंधर सिंह, शैलेंद्र पांडेय, मुसाफिर राय, आदि का कहना है कि इस बांध के बन जाने से अहिरौलीदान से बेतिया की दूरी सिमटकर मात्र 30 किलोमीटर हो जाएगी। इससे इस क्षेत्र के लोग आसानी से बेतिया आ-जा सकेंगे। इन लोगों का कहना है कि अभी इस क्षेत्र के लोगों को अहिरौलीदान से बेतिया के लिए 150 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।
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