गलन के साथ हवा चलने से ठंड दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। लोग इससे बचने के लिए विभिन्न तरीके अपना रहे हैं। इस ठंड का सबसे अधिक असर बुजुर्गों पर पड़ रहा है। खासकर दमा वाले जो लोग हैं, उन्हें ठंड में अत्यधिक दिक्कतें हो रही हैं। शुक्रवार को भी जनपद मुख्यालय पर आने वाले फरियादियों की तादाद काफी कम रही। दुकानदार इस दिनों ग्राहक कम आने से परेशान हैं।
मौसम ठीक रहने पर न केवल फरियादियों को जनपद मुख्यालय आने-जाने में सुविधा रहती है, बल्कि सवारीवाहन भी समय से उपलब्ध हो जाया करते हैं। जनपद मुख्यालय और प्रमुख सड़कों पर दुकान संचालित करने वाले दुकानदार भी ग्राहकों की आवक से खुश रहते हैं। कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारी समय से मिल जाते हैं, जिससे उनकी शिकायतों और समस्याओं का निस्तारण समय पर होने की संभावना रहती है।
इधर, एक महीने से अधिक समय से शीतलहर छाए रहने से जनपद मुख्यालय पर फरियादियों की संख्या बहुत कम रह रही है। जनपद मुख्यालय पर सन्नाटा छाया रह रहा है। विकास भवन में स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय में विधवा, वृद्धा और विकलांग पेंशन से जुड़े कार्यों से भी लोग कम ही आ रहे हैं। यही हाल विकास भवन के अन्य दफ्तरों, कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय पर भी रह रहा है। अफसर अपने निर्धारित समय तक कार्यालय में रह रहे हैं लेकिन फरियादी समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं और जब तक अफसर पहुंच रहे हैं, अधिकारी चले जा रहे हैं। शुक्रवार को तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के अवरवा गांव से आए जितेंद्र शर्मा ने बताया कि ठंड में सवारियां समय से न मिलने के कारण पुलिस लाइंस देर में पहुंचे, तब तक एसपी जा चुके थे। एएसपी हरिगोविंद मिश्र अपने कक्ष में बैठे मिले तो उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराए।
नगर के रामकोला रोड पर मिष्ठान की दुकान संचालित करने वाले विजय कुमार कहते हैं कि इस कड़ाके की ठंड में व्यवसाय एकदम मंदा हो गया है। धूप रहती है तो दूर-दराज से लोग पडरौना में बाजार करने या जनपद मुख्यालय पर अपनी फरियाद लेकर जाते हैं। ऐसे में वे चाय-नाश्ता के लिए दुकानों में रुकते हैं। शीतलहर के कारण लोगों की आवाजाही कम हो गई है।
नगर के छावनी पूर्वी मुहल्ला निवासी रामचंद्र प्रसाद (85) बताते हैं कि इस ठंड में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ठंडी हवा चलने और गलन के चलते पानी से हाथ धोने में भी ठंड लग रही है। बच्चे घर से बाहर नहीं निकलने नहीं दे रहे हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष और चेस्ट रोग स्पेशलिस्ट डॉ. बीके बर्नवाल (61) कहते हैं यह शीतलहर बुजुर्गों, खासकर वृद्धजनों पर भारी पड़ रही है। ऐसे मौसम में दमा, ब्रेन स्ट्रोक, हर्टअटैक, ब्लड प्रेशर और शुगर के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। क्योंकि इन बीमारियों का प्रभाव बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को इस कड़ाके की ठंड से बचने की जरूरत है।
ठंड से बचने के लिए अलाव का हो रहा इस्तेमाल
इस कड़ाके की ठंड में अलाव की डिमांड बढ़ गई है, फिर चाहे वह सरकारी अलाव हो या घर का। जिसे जहां भी अलाव जलता दिख रहा है, वहीं, पहुंचकर हाथ गर्म करने लग रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को ठंड में निकलने से रोक रहे हैं तथा उन्हें घर में ही रहने की हिदायत दे रहे हैं।