मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि आज जब विश्व संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, तब यह और भी सुनिश्चित हो जाता है कि विश्व को युद्ध की नहीं बल्कि बुद्ध की आवश्यकता है, क्योंकि हिंसा कभी स्थायी समाधान नहीं दे सकती।
समाधान का मार्ग केवल संवाद और करुणा से ही संभव है। बुद्ध का ''अप्प दीपो भव'' का मंत्र और मध्यम मार्ग आज भी मानवता के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इसी वैचारिकी को अपनाकर प्रगति की है और महात्मा बुद्ध ही भारतीय संविधान की प्रेरणा हैं।
कॉन्क्लेव में थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, जापान और नेपाल सहित कई देशों से आए 2,000 से अधिक बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों और निवेशकों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध सर्किट के समग्र विकास और कुशीनगर को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर में चांटिंग करते बौद्ध भिक्षु। संवाद
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उन्होंने अंत में विश्वास जताया कि 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र और बुद्ध के विचारों का अनुसरण करते हुए हम सभी मिलकर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।