खराब सड़कों से उड़ रही धूल लोगों को बना रही बीमार
एयर क्वालिटी जानना मुश्किल, गूगल के भरोसे हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। एक तरफ यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं चल रही हैं। जिले को अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकाने की कवायद हो रही है। हवाई अड्डे के जरिये देश दुनिया से शहर को जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं। मगर, यहां की खराब सड़कों से उठते धूल के गुबार इन प्रयासों को पीछे धकेल रहे हैं। स्थानीय आबादी घरों तक पहुंच रही धूल मिट्टी से परेशान है। लोग सांस के मरीज हो रहे हैं। यहां की हवा कितनी प्रदूषित हो चुकी है, यह मापने का भी कोई इंतजाम नहीं है। गूगल मैप या गोरखपुर में लगी मशीन के सहारे एयर क्वालिटी की जांच की जाती है।
जानकारों का कहना है कि गोरखपुर में लगी मानीटरिंग मशीन के जरिए कुशीनगर का औसत निकालकर सूचना बनाई जाती है। नगर में वाहनों की बढ़ती तादाद, निर्माण कार्य, खराब सड़क होने सहित अन्य वजहों से हवा का प्रदूषण बढ़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में मौसम गर्म होने लगता है। दिन में जहां गर्मी का अहसास होता है। वहीं रात में नमी होने से मौसम सर्द महसूस होता है। शाम के वक्त भी हवा में नमी रहती है। इससे हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ मिल रहा है। नमी होने से हवा में एक स्तर बन जाता है, जिससे धूल के कण, धुंआ सहित प्रदूषण के अन्य कारक ऊपर नहीं जा पाते। इस वजह से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। इसका मापन करने के लिए जगह-जगह उपकरण लगाए जाते हैं,लेकिन कुशीनगर में इसका इंतजाम नहीं है। गूगल पर उपलब्ध ब्यौरे के मुताबिक बृहस्पतिवार को कुशीनगर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 220 दर्ज किया गया। इतने प्रदूूषण में सांस लेने में परेशानी और गले में जलन की शिकायत हो सकती है।
यह है एक्यूूआई का मानक एक्यूआई प्रभाव
0-50 - कम असर
51-100 - बीमारी के प्रति संवेदनशील लोगों को सांस लेने में समस्या
101-200 - फेफड़ा, दिल की बीमारी से ग्रसित, बच्चों और बुजुर्ग लोगों के सांस लेने में दिक्कत
201-300 - लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस लेने की समस्या
301-400 - लंबे समय तक संपर्क में रहने वालों को सांस की बीमारी होती है
401 या ऊपर - स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत होनी लगती है
मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। सुबह और शाम के तापमान में काफी अंतर रह रहा है। ऐसे में वातावरण में नमी बनी हुई है। इस वजह से प्रदूूषण के कारक धूल, धुंआ इत्यादि ऊपर नहीं जाते हैं। इससे हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है। मौसम में नमी कम होने से प्रदूषण का स्तर भी कम हो जाता है।
- प्रो. गोविंद पांडेय, पर्यावरणविद,
हवा का प्रदूषण बढ़ेगा तो सांस की बीमारी भी बढ़ेगी। इसका सबसे ज्यादा असर बीमार और बुजुर्ग लोगों पर नजर आएगा। इससे बचाव के लिए ठोस उपाय करने होंगे।
डॉ. संजीव सुमन, हृदय रोग विशेषज्ञ, पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय पडरौना
इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। एयर क्वालिटी इंडेक्स मापने के लिए उपकरण लगवाए जाएंगे। इसके बारे में संबंधित विभाग से जानकारी ली जाएगी।
रमेश रंजन, डीएम, कुशीनगर