इंसेफेलाइटिस की रोकथाम और जागरूकता के लिए बुधवार को पडरौना और विशुनपुरा ब्लॉक में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें शामिल आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इंसेफेलाइटिस के लक्षण वाले बच्चों की देखभाल, अस्पताल पहुंचाने से पहले तक अपनाए जाने वाले उपायों और इस बीमारी से बचाव के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि इस बीमारी से बचने के लिए गांव में सफाई होना जरूरी है। साथ ही सुअरबाड़े आबादी से दूर होने चाहिए।
पडरौना ब्लॉक के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में बीडीओ गंगाराम वर्मा, बीईओ अजय तिवारी, सीडीपीओ अब्दुल कयूम, सुपरवाइजर मंजू देवी सहित कई शिक्षकों की मौजूदगी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को इंसेफेलाइटिस से बचाव के बारे में विस्तार से बताया गया। इसमें आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताया कि तेज बुखार और शरीर में अकड़न आने पर बच्चे को तत्काल नजदीक के सीएचसी-पीएचसी अथवा जिला अस्पताल ले जाएं। क्योंकि ऐसे मरीज को इंसेफेलाइटिस हो सकता है। बच्चों का समय पर टीकाकरण कराने के बारे में बताया गया। यदि किसी बच्चे में इंसेफेलाइटिस के लक्षण दिखे तो उस दरम्यान कौन से उपाय करें, इस बारे में भी बताया गया। इस दौरान शिक्षक मेहरुद्दीन, राजू ठाकुर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मालती देवी सहित काफी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा और अन्य लोग मौजूद थे।
जटहां बाजार प्रतिनिधि के अनुसार विशुनपुरा ब्लॉक सभागार में बुधवार को इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और शिक्षकों की एकदिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें इंसेफेलाइटिस को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। बीडीओ रघुनाथ सिंह ने कहा कि इंसेफेलाइटिस से बचने के लिए आस पास सफाई की जरुरत है। सीएचसी प्रभारी एएन ठाकुर ने कहा कि किसी भी आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अगर बुखार से पीड़ित मरीज मिले तो उसे तुरंत 102 या 108 नंबर के एंबुलेंस से भेजकर सीएचसी पर बने इंसेफेलाइटिस ट्रिटमेंट सेंटर में भर्ती करावें। उन्होंने प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज न कराने की सलाह दी। इसमें 15 से 20 मई तक चलाए जाने वाले इंसेफेलाइटिस जागरुकता अभियान के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान सीडीपीओ पूजा रानी, एडीओ पंचायत देवेंद्र मिश्र, ध्रुव शर्मा, मृत्युंजय पटेल, ग्राम विकास अधिकारी धनंजय तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे।