रामकोला। सीएचसी पर एक रुपये की पर्ची पर इलाज की उम्मीद मरीजों के अस्पताल पहुंचने पर दम ताेड़ दे रही है। सस्ता इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है।
मनचाही कंपनी की दवा लिखवाने के लिए सीएचसी में दवा एजेंट से लेकर दवा दुकानदारों का जमावड़ा और दबदबा है। अपनी बात को मनवाने के लिए वह विवाद से भी बाज नहीं आते। बुधवार को अस्पताल में हुए विवाद ने एक बार फिर सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टरों का तर्क है कि कुछ मरीजों ऐसे आते हैं, जिन्हें ऐसी दवाओं की जरूरत होती है जो अस्पताल में नहीं आती हैं। ऐसे में बाहर से कुछ दवाइयां लिखना मजबूरी हो जाती है। रामकोला सीएचसी पर बाहर से दवा लिखने और दवा दुकानदारों के हस्तक्षेप का खेल कोई नया नहीं है। इसके पहले भी दवा लिखने या अस्पतालों में दलालों के बीच विवाद हो चुका है और पुलिस तक मामला पहुंच चुका है। मामला बढ़ता है तो डॉक्टर कार्रवाई के लिए पुलिस से शिकायत भी करते हैं, लेकिन बाद में मामला मैनेज हो जाता है और बाहरी दवा लिखने का खेल फिर शुरू हो जाता है। प्रतिदिन 400 ओपीडी के अलावा करीब दस प्रसव भी होता है।
बृहस्पतिवार को इलाज कराने के लिए आए राजन, मंटू, नीलम, राकेश, रंजन, लीलावती, मनीष, आंजना, माया, रिंकी ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इलाज तो ठीक हो रहा है, लेकिन दवाएं बाहर से लिखी जा रही है। जबकि सरकार का कहना है कि सभी दवाइयां अस्पताल में मौजूद हैं। बीपी, शुगर वाले मरीजों को बाहर से दवा लेना पड़ रहा है। ओपीडी के दौरान दवा एजेंट भी मौजूद रहते हैं, पर्ची पर जब दूसरी दवा लिखी जाती है तो मेडिकल स्टोर संचालक भी डॉक्टर के कक्ष में घुसकर विवाद करते हैं। डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में खांसी, जुकाम, गले में दिक्कत वाले ज्यादा मरीज आ रहे हैं।
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