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Kushinagar News: छितौनी बांध बदहाल, पश्चिमी चंपारण हाईवे पर खतरा

Thu, 26 Jun 2025 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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बांध पर बचाव कार्य में जुटे मजदूर। संवाद  
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छितौनी/कुशीनगर। छितौनी-दरगौली रिंग बांध वर्तमान में बदहाल स्थिति में है। यह बांध एक लाख से अधिक की आबादी को बाढ़ से बचाने का सुरक्षा कवच था, अब खस्ताहाल हो चुका है।
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इस बांध की लंबाई 4.5 किलोमीटर है और यह बड़ी गंडक नदी के किनारे बनाया गया था। इसका उद्देश्य था कि आने वाले गंडक नदी के बाढ़ के पानी को प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने से रोका जा सके, लेकिन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा नहीं किया जा सका।
अब नतीजा यह है कि गंडक नदी में पानी भरने पर छितौनी कस्बा के अलावा कई गांवों में पानी भर जाता है और पडरौना से पश्चिमी चंपारण को जाने वाला एनएच-727 पर पानी पहुंच जाता है, इससे आवागमन ठप हो जाता है। बांध की बदहाली ने बलुआ टोला, बड़हरवा टोला, छोटका नरकहवा, नरकहवा, दरगौली, चलंतवा पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 727 के आसपास के गांवों को बाढ़ के जोखिम में डाल दिया है।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि बांध की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि हर बरसात में बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। छितौनी निवासी संजय सिंह बताते हैं, “बरसात शुरू होते ही हम रात भर जागकर बांध की निगरानी करते हैं। अगर बांध टूटा, तो हमारे गांव तबाह हो जाएंगे।” मेराज आलम, योगेश शर्मा और रामप्रवेश यादव जैसे अन्य ग्रामीणों ने भी बताया कि बांध की मरम्मत न होने से वे हर साल भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
गंडक नदी जब उफान पर होती है, तो बाढ़ का पानी बिना किसी रुकावट के छितौनी कस्बा, बलुआ टोला, चलंतवा पुल और एनएच 727 तक फैल जाता है, जिससे फसलें बर्बाद होती हैं, घरों में पानी घुसता है और सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
बांध की यह स्थिति कोई नई नहीं है। इसके निर्माण के समय से ही कई खामियां थीं, जिन्हें कभी दूर नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अपूर्ण निर्माण और रखरखाव की कमी ने बांध को अप्रभावी बना दिया है। वर्ष 2017 व 2021 की बाढ़ इसका एक बड़ा उदाहरण है, जब बांध का एक हिस्सा भारी दबाव के कारण टूटने की कगार पर था। उस समय ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर बोरियों की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया, वरना कई गांव जलमग्न हो सकते थे। लेकिन इसके बाद भी बांध का मरम्मत नहीं हुआ।
संजय सिंह मेराज आलम योगेश शर्मा रामप्रवेश यादव ने बताया कि बांध की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बरसात के मौसम में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों ने बताया कि वे हर साल भय के माहौल में जीने को मजबूर रहते हैं। जब गंडक नदी उफान पर होती है तो आने वाला बाढ़ का पानी बिना किसी रोकटोक के छितौनी कस्बा, बलुआ टोला, चलंतवा पुल और एनएच 727 तक फैल जाता है। बांध की जर्जर हालत के कारण कई गांव प्रभावित होते हैं, जिनमें बलुआ टोला, बड़हरवा टोला, छोटका नरकहवा, नरकहवा, दरगौली, चलंतवा पुल क्षेत्र और एनएच 727 के किनारे के कई गांव शामिल हैं।
इन गांवों में घरों तक पानी पहुंच जाता है, जिससे फसलें और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। बाढ़ खंड एसडीओ मनोरंजन कुमार ने बताया कि छितौनी दरगौली रिंग बंधे की मरम्मत के लिए शासन को पत्र भेजा गया था, लेकिन मरम्मत कराने के लिए बजट नहीं मिला। इसके चलते अस्थायी बचाव का इंतजाम किया गया है। एसडीआरएफ की टीम मांगा ली गई है। अगर गंडक नदी में पानी बढ़ता तो बचाव का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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