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Kushinagar News: रील देख हिंसक हो रहे बच्चे...अभिभावक की दूरी से स्वभाव में बदलाव

Sun, 15 Dec 2024 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। कोरोना काल के बाद ऑनलाइन पढ़ाई ने विद्यार्थियों के समय की बचत तो की है, लेकिन इसके दुष्परिणाम भी अब देखने को मिल रहे हैं। पढ़ाई के बहाने मोबाइल के संपर्क में लगातार रहने के कारण न सिर्फ बच्चों की याददाश्त पर असर पड़ रहा है, बल्कि वे रील इत्यादि देखकर हिंसक और जिद्दी भी होते जा रहे हैं।
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खासकर पांच वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चों में मोबाइल की लत लगने के बाद उनके स्वभाव में भी बदलाव होने लगा है। अभिभावकों का बच्चों को समय नहीं दे पाना, इसकी बड़ी वजह है। मोबाइल की लत के बढ़ते मामलों से चिकित्सक, मनोविज्ञानी और समाजशास्त्री भी हैरान हैं। अभी कुछ दिन पहले ही तमकुहीराज थाना क्षेत्र के करनपट्टी गांव में एक 12 वर्षीय बालिका ने नौ माह की ममेरी बहन को पानी टंकी में डाल दिया था। इससे मासूम की मौत हो गई थी।
कई दौर की पूछताछ के बाद बालिका ने स्वीकार किया कि उसने सीआईडी और क्राइम पेट्रोल सीरियल देखकर ऐसा कदम उठाया था। विशेषज्ञों की मानें तो संवादहीनता के कारण बच्चे अपराध में संलिप्त हो रहे हैं। अभिभावक बच्चों से बातचीत करते रहे। उनकी समस्याएं जानें और उसे दूर करने का प्रयास करें।
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10 साल में बहुत कुछ बदला : नशा मुक्ति केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. उपेंद्र चौधरी का कहना है कि 10 वर्षों में काफी कुछ बदल गया है। 10 पहले अभिभावक बच्चों को पर्याप्त समय भी देते थे और उनकी गतिविधियों पर नजर भी रखते थे। पहले बच्चे दोस्तों के साथ घूमने जाते थे, लेकिन अब मोबाइल से दोस्ती के कारण बच्चों ने दोस्त बनाने भी बंद कर दिए हैं। एक शोध के अनुसार, साल 2014 में 40 फीसदी अभिभावक बच्चों को समय नहीं देते थे, लेकिन अब 90 फीसदी अभिभावक बच्चों पर ध्यान ही नहीं दे रहे। इसी तरह पहले 20 फीसदी बच्चों के दोस्त नहीं होते थे, लेकिन अब 60 फीसदी बच्चों के दोस्त ही नहीं हैं। पहले 10 फीसदी मोबाइल की लत बच्चों को थी। मगर, अब 50 फीसदी से अधिक बच्चे मोबाइल के आदी हैं। पहले माता-पिता 35 फीसदी बच्चों को छूट नहीं देते हैं, लेकिन बदले इस समय में 80 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों को छूट दे दी है। इन दस वर्षों में बच्चों का बचपना एक तरह की छिन गया है। इसके पीछे कहीं न कहीं अभिभावक ही जिम्मेदार हैं।
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