पडरौना। बदलते मौसम में बच्चे डायरिया, जुकाम, खांसी की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज में दोपहर एक बजे से 150 बीमार बच्चे पहुंचे। इसके अलावा जनरल ओपीडी में भी डायरिया के 270 मरीज पहुंचे थे। जांच में पता चला कि बुखार वाले रोगियों का बदन टूट रहा है। वहीं, बच्चे जकड़न से परेशान हैं। बाल रोग विभाग में 25 बेड पर 27 बच्चे भर्ती हैं।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में बच्चों को दिखाने के लिए कतार लगी रही। मंगलवार को दोपहर एक बजे तक 150 मरीजों का उपचार हुआ था। बाल रोग विभाग के प्रोफेसर सप्तर्ष चट्टोपाध्याय ने बताया कि इस समय दिन में गर्मी पड़ रही है और रात में ठंडी हवा चल रही है। सर्द-गर्म के चलते बच्चे खांसी और जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें बुखार भी आ रहा है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में जकड़न और सांस की तकलीफ बढ़ गई है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश ने बताया कि ओपीडी में कई बच्चे कोल्ड डायरिया के मिल रहे, जिन्हें प्रारंभिक उपचार देते हुए भर्ती किया जा रहा है। आज पांच बच्चे भर्ती किए गए हैं। ये सभी डायरिया से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि उपचार में देरी होने पर बच्चों के फेफड़े पर प्रभाव पड़ता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। अधिकतर बच्चे मौसम जनित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। डायरिया के साथ ही सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि धूप निकलने पर मां बच्चे के शरीर से कपड़ा निकाल देती हैं। यह गलत है। शरीर से एकाएक कपड़ा निकालने से बच्चों का शरीर बाहरी वातावरण से सामंजस्य नहीं बिठा पाता है। इसलिए कुछ देर के अंतराल में बच्चाें के कपड़े उतारने चाहिए।