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Kushinagar News: केमिकल मिले रंग-गुलाल...खानपान की शुद्धता पर भी सवाल

Wed, 26 Feb 2025 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। होली मार्च के दूसरे सप्ताह में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। त्योहार के नजदीक आते ही अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। थोक मंडियों में धंधेबाज रंग, अबीर और गुलाल, मैदा, नमकीन, पापड़, चिप्स, बेसन आदि मिलावट सामानों की खेप गोरखपुर, कानपुर और दिल्ली से मंगा रहे हैं।
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लोगों के इसके बारे में जानकारी न हो, इसलिए धंधेबाज मिलावटी सामानों को रात में गोदामों में भर रहे हैं। अगले दो से तीन दिनों में फुटकर बाजार में इसकी आपूर्ति होनी शुरू हो जाएगी। ऐसे में त्योहारों पर होली से जुड़े सामानों की खरीदारी करते समय सावधानी बरतनी होगी। यदि चूक हुई तो केमिकल युक्त रंग व गुलाल लगाने से चेहरे की रंगत बदल जाएगी। वहीं खानपान भी शुद्ध न होने से सेहत पर भी असर पड़ सकता है।
होली के त्योहार पर सामानों की कमी न हो इसके लिए व्यापारी करीब 15 दिन पहले से ही गोदाम में सामान भरने में जुटे हैं। त्योहार पर होने वाली बिक्री को देखते हुए मिलावट करने वाले कारोबारी भी सक्रिय है। थोक मंडी में ज्यादातर गोदामों को कटिंग के माल से भरा जा रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर मंडी शुल्क और जीएसटी की चोरी भी हो रही है। सूत्र बताते हैं धंधेबाजों गोरखपुर के अलावा कानपुर, दिल्ली, लखनऊ, गाजियाबाद आदि बड़े शहरों से बेसन, मैदा, मेवा, नमकीन, चिप्स, पापड़, दाल, तेल, घी आदि सामग्रियों का कटिंग में ऑर्डर लगाए हैं। इसका कोई खास ब्रांड नहीं होता है। इन सामग्रियों की 200 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक की आकर्षक पैकिंग है। दाल, नमकीन, चिप्स, पापड़ दिखने में अच्छा लगे, इसलिए इनमें रंगों का इस्तेमाल किया गया है।
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गुदरी बाजार के एक थोक व्यापारी ने बताया कि ब्रांडेड कंपनियों के सरसों तेल, दाल, आटा के डीलरशिप से ज्यादा व्यवसाय कटिंग वाले कर रहे हैं। वह छोटे दुकानदारों को सामग्री उपलब्ध कराकर अधिक मुनाफा कमाने की लालच दे रहे हैं।
कानपुर व लखनऊ से पहुंच रहा खोआ : जिले में मिलावटी खोआ कानपुर और लखनऊ से पहुंचाया जा रहा है। प्रतिदिन 15 से 20 क्विंटल खेप हाटा, कसया, तमकुहीराज और पडरौना में पहुंच रही है। 180 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से इसे होटलों और रेस्टोरेंट में पहुंचाया जा रहा है। इस खोआ का इस्तेमाल मिठाई बनाने और विभिन्न व्यंजनों की रेसिपी तैयार करने में हो रहा है। वैवाहिक आयोजनों में तो ज्यादातर इसी खोआ का इस्तेमाल हो रहा है।
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