बाईपास निर्माण के लिए गिराई जा रही गिट्टी। संवाद
पडरौना। शहर में आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए सरस्वती चौक से हरका होते हुए मुख्य पश्चिमी गंडक नहर तक करीब नौ किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण कराया जा रहा है।
यह कार्य अंतिम दौर में चल रहा है। अब केवल एक किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य ही शेष रह गया है। उसे भी एक माह के भीतर पूरा कर दशहरा तक आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। इस तरह दशहर के आसपास लोग बहुप्रतीक्षित बाईपास से फर्राटा भर सकेंगे।
जिला मुख्यालय बनने के बाद पडरौना शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए शासन ने करीब पांच वर्ष पहले बाईपास निर्माण की मंजूरी दी थी। इसके बाद बाईपास निर्माण को लेकर विभागीय कार्रवाई शुरू कर पीडब्ल्यूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया गया।
जिला मुख्यालय के सरस्वती चौक से पडरौना के गंडक नहर तक 8.950 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए हुए विभागीय सर्वे में 12 गांवों के 1256 किसानों की पांच हेक्टेयर से अधिक जमीन जद में आई है। सड़क निर्माण कार्य की जद में आई भूमि को अधिग्रहीत कर किसानों को सरकार की तरफ से निर्धारित धनराशि के भुगतान की कार्रवाई कर उन्हें जमीन का मुआवजा देकर उनसे विभाग के पक्ष में रजिस्ट्री भी करा ली गई।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो सड़क निर्माण की जद में आए कुछ किसानों ने अपनी जमीन का मुआवजा की धनराशि से संतुष्ट नहीं हो रहे थे। इसके चलते वे कोर्ट गए थे। वहां मामला निस्तारित होने में हुए विलंब के चलते सड़क निर्माण कार्य पूरा करने में देरी हुई। जिन किसानों की जमीन का मुआवजा दे दिया गया था, उनकी जमीन अधिग्रहीत कर वहां निर्माण कार्य पहले ही पूरा करा लिया गया था।
न्यायालय में मामला सुलझाने के बाद पुन: सक्रिय हुआ पीडब्ल्यूडी संबंधित किसानों को भी सड़क की जद में आई जमीन का मुआवजा देकर सड़क निर्माण कार्य तेजी से कराने में जुटा है। करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क ही अब निर्माणाधीन है। उसे पूरा कराने में कार्यदायी संस्था जुटा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सबकुछ ठीक रहा तो करीब एक माह के भीतर निर्माणाधीन सड़क का निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।