संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। बजट में महात्मा बुद्ध से जुड़े पर्यटन स्थलों के विकास के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ लें तो यहां लगभग 50 से अधिक ऐसे स्थल हैं। लेकिन पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर महज आठ स्थलों की ही जानकारी साझा की गई है। यह अनदेखी पर्यटकों की आवक में रोड़ा बन रही है।
आधुनिक युग में लोग ऑनलाइन सर्च कर पर्यटन स्थलों को ढूंढ़ते हैं। वीडियो देखने के बाद खोजते हुए गूगल पर आते हैं, लेकिन पर्यटन विभाग की यूपी टूरिज्म वेबसाइट बुद्ध से जुड़े आठ स्थलों की जानकारी देती है। वहीं मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म की केंद्रीय वेबसाइट पर भी कुशीनगर से जुड़ी जानकारी के नाम पर वहीं पुराने कुछ कार्यक्रमों और टूर पैकेजों का ब्यौरा है। जबकि, युवाओं को विभाग से ज्यादा जानकारी है। इसे वह सोशल मीडिया पर साझा कर कुशीनगर का महत्व बढ़ा रहे हैं। 21वीं सदी में सवालों के सबसे तेज जवाब देने वाले वर्चुअल असिस्टेंट मेटा एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से भी कुशीनगर जिले के मुख्य पर्यटन स्थल और सभी स्थलों से जुड़े प्रश्न पूछने पर बुद्ध से जुड़े आठ-दस स्थल आ जा रहे हैं, जोकि पर्यटन विभाग से अधिक है। ऐसे में लोगों की डिजिटल पर बढ़ती निर्भरता के बावजूद पर्यटन विभाग की कुशीनगर नाम से कोई अलग वेबसाइट न होना और टूरिज्म वेबसाइट पर पुरानी चीजें ही अपलोड होना, कहीं न कहीं इस नए जमाने के पर्यटकों को बुद्ध स्थली से दूर रख रहा है। इसके कारण लोग जिले के पर्यटन स्थलों के बारे में पूरी जानकारी और खूबसूरती से रूबरू नहीं हो पा रहे हैं।
बुद्ध स्थलों के बाद भी जिले में ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो पर्यटकों को लुभाते हैं, लेकिन कुशीनगर को बुद्ध की धरती के तौर पर जाना-जाता है। 50 से अधिक धार्मिक, आध्यात्मिक, पुरातत्विक सहित अन्य ऐतिहासिक स्थल कुशीनगर जिले में हैं, जिनके बारे में पर्यटन विभाग को भी नहीं पता है। पर्यटन विभाग की यूपी टूरिज्म वेबसाइट और भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म वेबसाइट पर महज बुद्ध से जुड़े स्थल ही अंकित हैं, वह भी केवल कुशीनगर से जुड़े।
बुद्ध से जुड़े जिले में कई और भी स्थल है, इसमें फाजिलनगर सठियांव की अंतिम भोजन स्थली, कुकुत्था नदी आदि जगह है जो पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर नहीं है। इसके अलावा धार्मिक महत्व रखने वाले सूर्य मंदिर का भी जिक्र नहीं है जो उत्तर भारत का इकलौता सूर्य मंदिर कहा जाता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश शासन के एनआईसी पोर्टल पर उस्मानपुर, सुमही, फरेंदहा आदि पुरातात्विक स्थलों का जिक्र जरूर है, लेकिन पर्यटन विभाग ने बुद्ध को छोड़ दें तो किसी भी धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को कुशीनगर की श्रेणी में नहीं रखा है।
इस सदी की सबसे तेज एआई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी पड़ताल के संदर्भ में जब कुशीनगर के संदर्भ में जिले के मुख्य पर्यटन स्थल, पावानगर फाजिलनगर सठियांव का बुद्ध से क्या नाता है? कुशीनगर के प्रमुख बुद्ध स्थल कौन-कौन से है? कुशीनगर के कुल पर्यटन स्थल जैसे प्रश्न पूछने पर जवाब तो मिला, लेकिन इसमें पूरी जानकारी नहीं थी।
विभाग से अधिक संजीदा : कुशीनगर की खूबसूरती को प्रतिदिन वीडियो में शूट कर सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम, फेसबुक, यू-ट्यूब पर अपलोड करने वाले युवा इन्फ्लुएंसर पर्यटन विभाग से अधिक संजीदा हैं।