कसया। विश्व विख्यात तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु एवं 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो को संगीत जगत के सर्वोच्च सम्मान ग्रैमी अवॉर्ड से नवाजे जाने पर बुद्ध स्थली कुशीनगर में बौद्ध धर्मावलंबियों, भिक्षुओं एवं गणमान्य नागरिकों में हर्ष का माहौल है।
दलाई लामा को यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग मेडिटेशंस: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा के लिए प्रदान किया गया है, जिसमें शांति, करुणा और मानवीय मूल्यों का संदेश निहित है। इस सम्मान की सूचना मिलते ही कुशीनगर के बौद्ध समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। तिब्बती मंदिर के प्रमुख भंते कोचोंक टैंकयोंग की देखरेख में भिक्षुओं द्वारा तथागत बुद्ध का धम्म पाठ एवं पूजन किया गया और बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की गई।
उल्लेखनीय है कि दलाई लामा ग्रैमी अवॉर्ड प्राप्त करने वाले पहले बौद्ध धर्मगुरु हैं। इससे पूर्व उन्हें वर्ष 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। तिब्बत में चीन के हस्तक्षेप के बाद से वे भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस अवसर पर भंते कंचुक लामा ने कहा कि दलाई लामा को ग्रैमी सम्मान मिलना शांति और करुणा के मूल्यों को मानने वाले समस्त मानव समाज के लिए गर्व का विषय है।