पकवा इनार। बुद्ध दुनिया के पहले मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने दुनिया के दुखों को समझने का सबसे व्यवस्थित प्रयास किया। उसके कारणों और निवारण के रास्तों की तलाश की। बुद्ध का मार्ग जीवन की सार्थकता और शांति की तलाश का मार्ग है।
ये बातें प्रोफेसर राम सुधार सिंह ने चरथ भिक्खवे-दो के तहत आयोजित सचल कार्यशाला के दौरान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल कुशीनगर में आयोजित परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में कही। सचल कार्यशाला 12 तक चलेगी। यह कार्यशाला बुद्ध की नदी रोहन के साथ चलते हुए नामक विश्व शांति के लिए साहित्यिक सांस्कृतिक यात्रा के रूप में प्रोफेसर सदानंद शाही के संयोजन में आयोजित है। उच्च शिक्षा संस्थान शिमला की पूर्व चेयरमैन और बीकानेर विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर चंद्रकला पाडिया ने कहा कि बुद्ध को पूजने से ज्यादा इनको पढ़ने की आवश्यकता है।
ज्ञान के माध्यम से दुनिया में अज्ञानता से उत्पन्न प्रत्येक प्रकार के अंधकार को नष्ट किया जा सकता है। कार्यशाला को संयोजक प्रोफेसर सदानंद शाही, प्रोफसर पंकज चतुर्वेदी, बिहाग वैभव, शिवांगी गोयल आदि ने भी संबोधित किया। संचालन प्रोफेसर गौरव तिवारी ने किया। इस दौरान पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अमृतांशु शुक्ल, प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह, मनोज सिंह आदि मौजूद रहे।