तमकुहीरोड। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर से बांसी नदी में काफी मात्रा में पानी छोड़ दिए जाने से दमकल घाट पर बना बांस-बल्ली के पुल का आधा हिस्सा बह गया है। इसके साथ ही बांसी नदी के निकटवर्ती क्षेत्रों में बोई गई गन्ना और धान की फसल भी जलमग्न हो गई हैं। पुल का आधा हिस्सा बह जाने से इस रास्ते आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
तमकुहीरोड से नारायणपुर, चौबेया पटखौली, रामपुर पट्टी, बिनटोलिया, रामपुर बरहन, खानगी, परोरही, बकुलहवा, दरोगाडीह, अमवादीगर, अमवाखास, लक्ष्मीपुर, भवानीपुर, मडुवाडीह, बरवापट्टी सहित अन्य गांवों में आने-जाने के लिए लोगों ने बांसी नदी के दमकल घाट पर बांस-बल्ली का पुल बनवा रखा था। इसके सहारे लोग आते-जाते थे, लेकिन मुख्य पश्चिमी गंडक नहर से बांसी नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ दिए जाने से नदी के जलस्तर में इतनी वृद्धि हो गई है कि पानी के तेज बहाव को पुल झेल नहीं पाया और बुधवार की शाम उसका आधा हिस्सा बह गया। यही नहीं घाटटोला, सेवरही, बिनटोली, मलाहीटोला, सिसवनिया आदि गांवों में कई भूमि में बोई गई गन्ना और धान की फसल भी जलमग्न हो गई है। पुल के बह जाने से आवागमन ठप हो गया है और लोगों को दूसरे मार्गों से तमकुहीरोड आना-जाना पड़ रहा है।
क्षेत्र के गुड्डू यादव, हाकिम अंसारी, राजन सिंह, विनोद वर्मा, संतोष, पुष्पेंद्र पांडेय आदि का कहना है कि पुल बह जाने के चलते अब उन्हें तीन से चार किमी की अतिरिक्त दूरी तय करके दूसरे पुल से आना जाना पड़ रहा है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अवर अभियंता राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि नहर से बांसी नदी में पानी छोड़ा जाना सामान्य प्रक्रिया है। वैसे अब रेग्युलेटर का फाटक बंद कर दिया गया है।